मुंबई/बारामती | उपमुख्यमंत्री अजित पवार के आकस्मिक निधन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में उपजे खालीपन और संभावित अस्थिरता को देखते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्वयं मोर्चा संभाल लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर अमित शाह, भाजपा के नवनिर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के साथ बारामती पहुँचे और अजित पवार को अंतिम विदाई दी। जानकारों का मानना है कि शाह की यह उपस्थिति केवल शोक संवेदना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक स्पष्ट संकेत है कि भाजपा संकट की इस घड़ी में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित गुट) को बिखरने नहीं देगी और महायुति के संतुलन को हर हाल में बरकरार रखेगी।
अजित पवार के जाने के बाद भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बढ़ते राजनीतिक कद और उनके संभावित कड़े तेवरों को संतुलित करने की है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व को डर है कि अजित पवार की अनुपस्थिति में शिंदे गुट मोल-भाव तेज कर सकता है या उनके कुछ विधायक वापस उद्धव गुट की ओर रुख कर सकते हैं। साथ ही, एनसीपी (अजित गुट) के विधायकों को शरद पवार खेमे में जाने से रोकना भी भाजपा की सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है। रणनीतिक रूप से भाजपा अब ऐसी स्थिति बनाना चाहती है जिससे सरकार की स्थिरता पर कोई आंच न आए।
एनसीपी के अस्तित्व को बचाने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने के लिए भाजपा अब अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार को आगे लाने की योजना बना रही है। चर्चा है कि उन्हें जल्द ही राज्य विधानसभा या राज्यसभा के जरिए सदन में लाकर बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। भाजपा का एक प्रभावशाली वर्ग उन्हें उपमुख्यमंत्री बनाने का भी पक्षधर है, ताकि पार्टी में नेतृत्व का संकट खत्म हो सके और सहानुभूति की लहर का राजनीतिक लाभ मिल सके। अगले एक सप्ताह के भीतर महाराष्ट्र कैबिनेट और महायुति के सांगठनिक ढांचे में बड़े बदलावों की संभावना जताई जा रही है।

