
जबलपुर। लखनादौन टोल रोड लिमिटेड के अधिकारियों के द्वारा हाईकोर्ट में याचिकाकर्ता कर्मचारी को वेतन का भुगतान करने के वादा किया था। हाईकोर्ट में वादा करने के बावजूद भी कंपनी की तरफ से सिर्फ दो माह का वेतन दिया गया। हाईकोर्ट जस्टिस बी पी सिंह की एकलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अवमानना याचिका को सुनवाई के लिए पुनः सूचीबद्ध करने के आदेश जारी किये हैं।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने लखनादौन टोल रोड लिमिटेड (टीएलटीआरएल) के सत्येन्द्र कुमार की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया था कि साल 2017 में उसे अनुबंध के आधार पर हेल्पर के पद पर नियुक्त किया गया था। अनुबंध हर साल नवीनीकृत होता रहा। कंपनी ने जुलाई 2023 को कंपनी ने इसे एकतरफा तरीके से उसकी सेवा समाप्त कर दिया। जिसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाईकोर्ट ने 22 अगस्त 2023 को अंतरिम आदेश पारित कर कंपनी को कोई याचिकाकर्ता के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नही करने का निर्देश दिया। यह अंतरिम राहत आगे की सुनवाइयों में बरकरार रही।
कंपनी ने अंतरिम आदेश का पालन करते हुए कर्मचारी को काम पर रखा, लेकिन वेतन भुगतान से इनकार कर दिया। कंपनी ने नो वर्क, नो पे का हवाला देकर 23 अगस्त 2023 से वेतन रोक लिया। जिसके खिलाफ कर्मचारी ने अवमानना याचिका दायर की। हाईकोर्ट में अवमानना याचिका की सुनवाई के दौरान कंपनी की तरफ से 30 दिनों में याचिकाकर्ता के वेतन भुगतान की गारंटी दी थी।
हाईकोर्ट में भुगतान की गारंटी देने के बावजूद भी कंपनी ने कर्मचारी को सिर्फ दो माह का वेतन भुगतान किया। कर्मचारी के तरफ से दायर आवेदन की सुनवाई करते हुए उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से अधिवक्ता हितेन्द्र गोल्हानी ने पैरवी की।
