प्राचार्य को जांच में दोषी पाये जाने के बाद कार्रवाई क्यों नहीं

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा है कि जनभागीदारी समिति की राशि में हेरफेर के मामले में जांच के बाद शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय सागर की प्राचार्य के खिलाफ जांच में दोषी पाए जाने पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने उच्च शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा आयुक्त, अतिरिक्त संचालक सागर संभाग, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. सरोज गुप्ता को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिये है।

दरअसल यह मामला सागर निवासी नितिन शर्मा की ओर से दायर किया गया है। जिनकी ओर से अधिवक्ता विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र कुमार शाह, अखिलेश प्रजापति ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि महाविद्यालय की पूर्व प्रभारी प्राचार्या डॉ. सरोज गुप्ता के विरुद्ध गठित उच्च शिक्षा विभाग गठित जाँच समिति की रिपोर्ट पर राज्य सरकार द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है। समिति में प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, मकरोनिया के प्राचार्य डॉ. एसी जैन एवं प्रोफेसर डॉ. बिन्दु श्रीवास्तव शामिल थे।

समिति ने 19 जून 2025 की विस्तृत जाँच रिपोर्ट में बताया कि डॉ. सरोज गुप्ता द्वारा वरिष्ठता सूची में हेराफेरी कर स्वयं को प्राचार्य नियुक्त करवाया है। यह भी पाया है कि डॉ. सरोज गुप्ता प्राचार्य के पद का दुरुपयोग कर महाविद्यालय की जनभागीदारी निधि से संबंधित दो करोड़ रुपये की एफडी को बिना अनुमति तुड़वाया है तथा एक निजी बैंक में चालू खाता खोल कर उसमें दो करोड़ रुपए जमा कराए। पूरे मामले का अवलोकन करने के बाद न्यायालय ने अनावेदकों से जवाब तलब किया है।

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