किफायती आवास के लिए कर छूट और ‘किराये के लिए आवास निर्माण’ की नीति जरूरी: नरेडको

नयी दिल्ली, 22 जनवरी (वार्ता) राष्ट्रीय रियल एस्टेट विकास परिषद (नरेडको) ने सभी को आवास मुहैया कराने के सपने को साकार करने के लिए सरकार से करों में छूट देने, आयकर की कुछ धाराओं में सुधार तथा किराये पर आवास के लिए नीति निर्माण का अनुरोध किया है। नरेडको के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी ने यहां गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना से करोड़ों लोगों को घर मिला है, लेकिन सबके लिए अपना घर का लक्ष्य अब भी काफी दूर है। जमीन की ऊंची कीमतों के कारण बिल्डरों के लिए किफायती आवास बनाना अब संभव नहीं है, इसलिए सरकार को नियमों में बदलाव, कर प्रोत्साहन और किराये पर आवास के विकल्प पर विचार करना चाहिये। उन्होंने कहा कि पिछले साल के बजट में उद्योगों को अपने कामगारों के लिए किराये के आवास बनाने की छूट दी गयी है। इसे रियल एस्टेट सेक्टर के लिए भी खोल दिया जाना चाहिए। जैसे पहले चैरिटेबल ट्रस्ट चॉल बनाते थे, उसी प्रकार उन्हें किराये के लिए आवास और किफायती आवास भी बनाने चाहिये। किराये के लिए आवास का मतलब है कि बिल्डर मकान बनाकर उसे बेचने की बजाय किराये पर लगा सकेंगे ताकि उन लोगों को भी घर मिल सके जो घर खरीदने में असमर्थ हैं।

श्री हीरानंदानी ने कहा कि आयकर के नियमों के तहत मकान यदि खाली हो तब भी उसके सांकेतिक किराये पर कर लगता है। आयकर कानून की धारा 43 सीए में सर्किल रेट से 10 प्रतिशत तक कम कीमत पर ही बिक्री की अनुमति है। इससे ज्यादा छूट देने पर क्रेता और विक्रेता दोनों पर दंड लगता है। यही कारण है कि रियल एस्टेट डेवलपर चाहें भी तो कम कीमत गरीबों को घर नहीं मुहैया करा सकते। धारा 71 के तहत किराये पर दिये गये आवास के नुकसान की भरपाई दूसरे कारोबार में हुए मुनाफे से नहीं कर सकते, जबकि दूसरे कारोबारों के लिए ऐसा कोई प्रतिबंध नहीं है। इन सभी नियमों के कारण हर आदमी के लिए घर का सपना मुश्किल हो रहा है। उन्होंने बताया कि नरेडको ने आगामी बजट के लिए ये सभी सुझाव सरकार के समक्ष रखे हैं। नरेडको के अध्यक्ष प्रवीण जैन ने कहा कि होम लोन पर ब्याज पर कर छूट की सीमा दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये किया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि सेक्शन 80सी के तहत प्रोत्साहन और स्टांप ड्यूटी तथा अन्य शुल्कों में कमी की जानी चाहिये। उन्होंने महंगी जमीन के समाधान के रूप में निजी सार्वजनिक भागीदारी के तहत फ्लैट बनाने की वकालत की। इससे जमीन सरकार की ही रहेगी और बिल्डर पर सिर्फ निर्माण का बोझ आयेगा। श्री जैन ने कहा कि नीतियों में बदलाव कर प्रति हेक्टेयर ज्यादा लोगों के रहने की अनुमति मिले ताकि ऊंची इमारतें बनाकर अधिक से अधिक लोगों के लिए अपना घर सुनिश्चित किया जा सके। श्री हीरानंदानी ने कहा कि समाधान मौजूद हैं, बस उसे धरातल पर उतारने और इसके लिए नीतियों में जरूरी बदलाव करने की जरूरत है।

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