वॉशिंगटन | अमेरिकी विस्तार का इतिहास 1783 में 13 ब्रिटिश उपनिवेशों की आजादी से शुरू हुआ था। जॉर्ज वाशिंगटन के नेतृत्व में संविधान बनने के बाद, अमेरिका ने अपनी सीमाओं को बढ़ाने के लिए ‘खरीद और समझौते’ की नीति अपनाई। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 1803 की ‘लुइसियाना परचेज’ है, जहाँ अमेरिका ने फ्रांस को मात्र 1.5 करोड़ डॉलर देकर अपना क्षेत्रफल रातों-रात तीन गुना बढ़ा लिया था। इसके बाद 1819 में स्पेन से फ्लोरिडा की खरीद और 1845 में टेक्सास का विलय अमेरिकी साम्राज्य के विस्तार में मील का पत्थर साबित हुआ।
अमेरिका ने केवल समझौतों से ही नहीं, बल्कि सैन्य शक्ति के बल पर भी विस्तार किया। 1848 में मेक्सिको को युद्ध में हराकर कैलिफोर्निया जैसे समृद्ध क्षेत्रों पर कब्जा किया गया। वहीं, 1867 में रूस के साथ हुई ‘अलास्का डील’ आज भी चर्चा में रहती है, जिसमें अमेरिका ने केवल 72 लाख डॉलर में एक विशाल बर्फीला क्षेत्र अपने नाम कर लिया था। हालांकि, इस विस्तारवाद का एक काला पक्ष ‘कैलिफोर्निया नरसंहार’ जैसे बलपूर्वक विलय भी रहे, जहाँ हजारों स्थानीय लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी।
वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब इसी ऐतिहासिक विस्तारवादी परंपरा को ‘ऑपरेशन ग्रीनलैंड’ के जरिए दोहराना चाहते हैं। ग्रीनलैंड को खरीदने के प्रस्ताव का विरोध करने वाले यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाकर ट्रंप ने साफ कर दिया है कि वे अपनी रणनीतिक सीमाओं को बढ़ाने के लिए आर्थिक दबाव का उपयोग करने से पीछे नहीं हटेंगे। लुइसियाना और अलास्का से शुरू हुआ यह सफर अब आधुनिक युग में ग्रीनलैंड तक पहुँचने की कोशिश कर रहा है, जो अमेरिका की पुरानी ‘मेनिफेस्ट डेस्टिनी’ (Manifest Destiny) वाली सोच को एक बार फिर वैश्विक राजनीति के केंद्र में ले आया है।

