दावोस में एचसीएल टेक से मध्यप्रदेश प्रतिनिधिमंडल की अहम बातचीत, टियर-2 टेक हब के रूप में विस्तार पर मंथन

भोपाल। दावोस दौरे के प्रथम दिन मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि मंडल ने वैश्विक आईटी सेवा क्षेत्र की अग्रणी कम्पनी एचसीएल हाई टेक के कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट अभय चतुर्वेदी से चर्चा की। चर्चा के दौरान मध्यप्रदेश शासन के टियर-2 टेक्नोलॉजी हब के रूप में विस्तार की संभावनाओं पर संवाद हुआ। प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेन्द्र कुमार सिंह ने टियर-2 टेक्नोलॉजी हब के रूप में मध्यप्रदेश में विस्तार की संभावनाओं की जानकारी दी। बैठक में कॉर्पोरेट वाइस प्रेसिडेंट अभय चतुर्वेदी ने बताया कि कंपनी पारंपरिक आईटी केंद्रों से आगे बढ़ते हुए टियर-2 शहरों में अपने संचालन का विस्तार करने के अवसरों का आकलन कर रही है। इस संदर्भ में मध्यप्रदेश को एक उभरते और संभावनाशील गंतव्य के रूप में देखा जा रहा है।

चर्चा के दौरान एचसीएल टेक की प्रमुख आवश्यकताओं पर विस्तार से विचार किया गया, जिनमें कुशल मानव संसाधन की उपलब्धता, विश्वसनीय विद्युत अधोसंरचना और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कनेक्टिविटी शामिल है। मध्यप्रदेश की ओर से इन सभी मानकों पर राज्य की सुदृढ़ स्थिति को रेखांकित किया गया, जिसे मजबूत नीतिगत ढांचे और निरंतर बेहतर होती अधोसंरचना का समर्थन प्राप्त है।

मध्यप्रदेश शासन की ओर से बैठक में अपनी विशेष ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) पॉलिसी, प्रतिस्पर्धी लागत लाभ और रेडी-टू-मूव-इन ऑफिस स्पेस की उपलब्धता की जानकारी साझा की। साथ ही लीज रेंटल में प्रोत्साहन, कौशल विकास एवं रोजगार सृजन से जुड़े प्रावधानों, सिंगल विंडो क्लियरेंस और ईज़ ऑफ डूइंग बिजनेस के प्रभावी क्रियान्वयन को भी प्रस्तुत किया गया। बैठक में यह बताया गया कि राज्य में आईआईटी, एनआईटी, और आईआईएसईआर जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों की मौजूदगी के साथ बेहतर होती जीवन गुणवत्ता, मध्यप्रदेश को टेक्नोलॉजी आधारित निवेश के लिए एक आकर्षक स्थान बनाती है।

एचसीएल टेक ने मध्यप्रदेश में भविष्य के टेक्नोलॉजी सेंटर्स और ऑफशोर डेवलपमेंट सेंटर्स (ओडीसी) की संभावनाओं के आकलन में गहरी रुचि व्यक्त की। दोनों पक्षों के बीच संयुक्त आउटरीच गतिविधियों पर भी चर्चा हुई, जिसमें प्रवासी समुदाय से जुड़ाव के माध्यम से उन वैश्विक तकनीकी पेशेवरों तक पहुंच बनाने के अवसर शामिल हैं, जिनकी जड़ें मध्यप्रदेश से जुड़ी हैं।

आगामी चरण में संभावित विस्तार के लिए एक रणनीतिक रोडमैप तैयार करने और सहयोगात्मक आउटरीच पहलों पर आगे चर्चा किए जाने पर सहमति बनी। यह संवाद मध्यप्रदेश की उस प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जिसके तहत राज्य स्वयं को अगली पीढ़ी के टेक्नोलॉजी निवेश और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स के लिए एक पसंदीदा गंतव्य के रूप में स्थापित कर रहा है।

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