धीमी गति से चल रहा गंज मंडी कॉम्प्लेक्स का निर्माण कार्य

बैतूल: बैतूल गंज मंडी में अधूरे कॉम्प्लेक्स के निर्माण को लेकर नगरपालिका द्वारा पुनटेंडर कर काम तो शुरू करा दिया गया है, लेकिन काम की रफ्तार काफी धीमी है।विस्थापित दुकानदारों का बढ़ा और इंतजार काम्प्लेक्स बनना है 400 दुकानें आरोप है कि यहां निर्माण के नाम पर केवल लीपापोती की जा रही है। जिससे दुकानदारों में नाराजगी भी बनी हुई है। दुकानदारों का आरोप है कि जो दीवारे खड़ी की जा रही है, उनकी तराई तक नहीं हो रही है। जिससे निर्माण को गुणवत्ता पर सवाल सवाल खड़े हो रहे है। गंज में बहुमंजिला काम्प्लेक्स का निर्माण करीब 11 साल पहले शुरू हुआ था। लेकिन ड्रग डिजाइन बदलने से इस काम में देरी हुई।

जानकार बताते है कि काम्प्लेक्स की बार-बार ड्राइंग डिजाइन बदलने से पुराने ठेकेदार ने बीच में ही काम छोड़ दिया था। जिसके बाद नगरपालिका ने पुनः टैंडर कर कॉम्प्लेक्स को पूरा करने की शुरुआत की, लेकिन इस काम में गुणवत्ता को परे रखकर काम किये जाने का आरोप लग रहा है। जानकारों का मानना है कि बिना उचित तराई के खड़ी की गई दीवारें भविष्य में कमजोर साबित हो सकती है। बता दे कि अधूरे काम्प्लेक्स को पूरा करने नगरपालिका को दोबारा टेंडर करना पड़ा, जिससे इस पूरे प्रोजेक्ट की लागत बढ़कर करीब 17 करोड़ रुपए पहुंच गई। इस लागत में पहले चरण में पुराने अधूरे काम्प्लेक्स का निर्माण पूर्ण करना और दूसरे चरण में नए काम्प्लेक्स, पार्किंग ओर अन्य सुविधाओं का निर्माण शामिल है।

बावजूद इसके आठ महीने बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सका है। काम्प्लेक्स में बनना है 400 दुकानें गंज मंडी काम्प्लेक्स में करीब 400 दुकानों का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन अभी तक 100 दुकानों का निर्माण भी निर्माण पूरा नहीं हो सका है। बार-बार ड्राईंग और डिजाइन में किए गए चदलावों ने निर्माण कार्य को प्रभावित किया है। पुराने टेंडर को निरस्त कर नए सिरे से टेंडर करने के बावजूद हालात नहीं सुधरे हैं। नतीजतन, विस्थापित दकानदारों को अब भी लबे इंतजार के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कुल मिलाकर, गंज मंडी काम्प्लेक्स का निर्माण नगरपालिका की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। अगर समय रहते गुणवत्ता, विस्थापितों को जी दुकानें आवंटित होना है, उनमें शटर और टाइल्स लगाने का काम शेष है। शटर बनाने का काम चल रहा है। जल्द ही दुकानें पूर्ण कर ली जाएंगी। हम निर्माण कार्य की मॉनिटरिंग लगातार कर रहे हैं।- नगेन्द्र वागाई, सब इंजीनियर नपा बैतूल।
प्राथमिकता और गति पर ध्यान नहीं अधूरी योजनाओं की सूची में दिया गया, तो यह परियोजना भी शामिल हो सकती है।
टीन शेड और तारपोलिन में लग रहीं दुकानें
| जब से गंज मंडी कॉम्पलेक्स का निर्माण शुरू हुआ है तभी से गंज का बाजार बुरी तरह से अव्यवस्थित हो गया है। कॉम्पलेक्स में जिन व्यापारियों ने दुकानें ली हैं, वे फिलहाल अव्यवस्थित रूप से लंबे समय से व्यापार करने को मजबूर है. कोई तारपोलिन लगाकर तो कोई टीन की टपरी में अपनी दुकान संचालित कर रहा है। सबसे बड़ी बात यह है कि अब लंबा समय बीत जाने के बाद व्यापारियों के भी सब्र का बांध फूट रहा है। व्यापारियों का कहना है कि कभी लागत बढ़ रही है, तो कभी ड्राइंग डिजाइन बदली जा रही है। नपा द्वारा व्यापारियों की सुविधाओं को पूरी तरह से नजर अंदाज किया जा रहा है, इसलिए गंज के व्यापारी जनप्रतिनिधियों से भी कई बार मिलकर मंडी कॉम्पलेक्स निर्माण पूरा करने की गुहार लगा चुके हैं।

दुकानों का आवंटन किया, हैंडओवर नहीं
तीन साल पहले 65 दुकानदारों ने काम्प्लेक्स में दुकान पाने नगरपालिका में रुपए जमा किए थे। लॉटरी से दुकानों का आवंटन भी कर दिया था, लेकिन आज तक दुकानों का हैंडओवर नहीं हो सका है। काम्प्लेक्स में आधी दुकाने तो बना दी गई है, लेकिन वे भी अधूरी हालत में है। ऐसे में जिन दुकानदारों ने राशि जमा कर उम्मीद लगाई थी, उन्हें अब भी अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। री-टेंडर के बाद जब निर्माण कार्य दोबारा शुरू हुआ तो, उम्मीद जगी थी कि अब उन्हें जल्द ही दुकानें मिल जाएंगी, लेकिन जमीनी स्थिति इसके विपरीत है। काम की रफ्तार काफी धीमी बताई जा रही है, जिससे परियोजना के समय पर पूर्ण होने पर संदेह और गहरा गया है

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