पुणे जीटी 2026 जैसी स्पर्धा भारत में साइकिलिंग की लोकप्रियता बढ़ा सकती हैं: सूर्या रमेश थाथू

पटियाला, 17 जनवरी (वार्ता) भारत के सबसे जाने-माने साइकिलिस्ट में से एक सूर्या रमेश थाथू का मानना है कि बजाज पुणे ग्रैंड टूर जैसी और अंतरराष्ट्रीय स्तर की साइकिलिंग स्पर्धा की मेजबानी करने से देश में इस खेल की लोकप्रियता काफी बढ़ सकती है।

फिलहाल पटियाला में आने वाले बजाज पुणे ग्रैंड टूर 2026 की तैयारी कर रहे सूर्या ने साइकिलिंग को ज़्यादा पहचान दिलाने के लिए भारत में हर साल इसी स्टैंडर्ड की दो से तीन हाई-क्वालिटी रेस की मेजबानी करने की जरूरत पर बल दिया।

साइकिलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया द्वारा 2024 में सर्वश्रेष्ठ साइकिलिस्ट चुने गये सूर्या ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा, “भारत में साइकिलिंग को स्वीकार किया जा रहा है। जरूरत इस बात की है कि देश हर साल उच्च स्तरीय टूर्नामेंट की मेजबानी करे। अगर पुणे जीटी जैसी दो या तीन बड़ी रेस हर साल होती हैं, तो साइकिलिंग भारत में क्रिकेट जैसी लोकप्रिय हो सकती है।”

बजाज पुणे ग्रैंड टूर 2026 पुरुषों के लिए भारत की पहली यूसीआई 2.2 कैटेगरी की मल्टी-स्टेज, पांच-दिवसीय कॉन्टिनेंटल साइकिलिंग रेस है। यह पांच-दिवसीय रेस, जो 19 से 23 जनवरी 2026 तक होनी है, इसमें पुणे जिले के अलग-अलग इलाकों में 437 किलोमीटर में फैले चार से ज़्यादा स्टेज शामिल होंगे। रेस में भारतीय दल में 6-6 राइडर्स की दो टीमें शामिल हैं – भारतीय राष्ट्रीय टीम और भारतीय विकास टीम। सूर्या भारतीय राष्ट्रीय टीम का हिस्सा हैं।

27 वर्षीय साइकिलिस्ट ने माना कि घरेलू मैदान पर मुकाबला करने का अपना दबाव होता है, लेकिन इसके फायदे भी हैं। उन्होंने कहा, “मेजबान होने के नाते, दबाव तो होगा ही, लेकिन यह एक फायदा भी है। आपको रास्ता पता होता है और मौसम भी आपके अनुकूल होता है। उम्मीदें होंगी, और अगर आप अच्छा प्रदर्शन नहीं करते हैं, तो आलोचना भी होगी।”

शिव छत्रपति पुरस्कार विजेता ने अपनी यात्रा के बारे में बताया कि शुरुआत में उन्होंने खुद ही अभ्यास किया, लेकिन कोच अमित जांगड़ा के तहत ट्रेनिंग शुरू करने के बाद उनके प्रदर्शन में काफी सुधार हुआ।

उन्होंने कहा, “मैंने एक स्केटर के रूप में शुरुआत की और बाद में साइकिलिंग में आ गया। शुरुआत में, मैंने स्वयं ही ट्रेनिंग ली, अपने आस-पास के लोगों से सीखा और दूसरों को देखकर सीखा। मैंने बिना किसी स्ट्रक्चर्ड प्रोग्राम के एंड्योरेंस राइड्स और स्प्रिंट वर्क पर बहुत ध्यान दिया। मैंने अपनी खुद की ट्रेनिंग से मेडल जीते, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला करने के लिए, एक सही ट्रेनिंग स्ट्रक्चर ज़रूरी है।”

उन्होंने कहा कि 2023 में उन्हें पेशेवर गाइडेंस की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि अब समय आ गया है कि मुझे एक ऐसा कोच मिले जो मुझे एक स्ट्रक्चर्ड प्रोग्राम दे सके और सिर्फ एंड्योरेंस राइड्स करने के बजाय मेरी कमजोरियों पर काम कर सके। तब से बहुत कुछ बदल गया है। मैं एक स्प्रिंटर से एक अच्छा क्लाइंबर और टाइम ट्रायलिस्ट बन गया हूं।”

अपनी रेसिंग स्टाइल में आए बदलाव को लेकर सूर्या ने कहा, “पहले मैं सिर्फ एक स्प्रिंटर था। एक स्प्रिंटर के तौर पर, आप एक्सप्लोसिवनेस पर निर्भर रहते हैं, लेकिन जब आप टाइम ट्रायल में जाते हैं, तो आप एक मज़बूत ओवरऑल थ्रेशहोल्ड विकसित करते हैं जिसे आप एक घंटे या उससे ज़्यादा समय तक बनाए रख सकते हैं।”

उन्होंने यह भी बताया कि महाराष्ट्र में कई प्रतिभावान साइकिलिस्ट हैं, लेकिन उनके पास अंतरराष्ट्रीय स्तर के जरूरी अनुभव की कमी है।

उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र में बहुत अच्छे साइकिलिस्ट हैं, लेकिन उन्हें और अधिकतर को अनुभव की जरूरत है। मेरे टीम के साथी और मैं विदेश में रेस कर रहे हैं। कई और रेसर भी हैं जो उतने ही टैलेंटेड हैं। उन्हें रेसिंग की टैक्टिक्स सीखने के लिए अनुभव की ज़रूरत है, जो केवल अंतरराष्ट्रीय स्तार पर मुकाबला करने से ही आता है।”

उन्होंने कहा, “कुछ राइडर दोस्तों के साथ, हम इंटरनेशनल अनुभव के लिए बेल्जियम में रेस करने की योजना बना रहे हैं और अगले महीने दुबई टूर की भी योजना बना रहे हैं। हम ग्रैन फोंडो चैंपियनशिप में हिस्सा लेने की कोशिश करेंगे।”

उन्होंने कहा, “ट्रैक और रोड रेसिंग के बीच, मुझे पर्सनली रोड रेसिंग ज़्यादा पसंद है। भारतीय राइडर्स ने ट्रैक साइकिलिंग में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है। हम 2018 विश्व चैंपियनशिप में अंडर-18 कैटेगरी में वर्ल्ड चैंपियन थे और कई एशियन चैंपियनशिप मेडल जीते हैं। हम लगातार पदक जीत रहे हैं।”

सूर्या ने आखिर में उभरते हुए साइकिलिस्टों को सलाह दी कि मुश्किलों का सामना करते हुए मजबूत बने रहें। उन्होंने कहा, “अपने सपनों के लिए काम करें और आसानी से हार न मानें। कई बार ऐसा होगा जब आप निराश महसूस करेंगे और कड़ी मेहनत के बाद भी नतीजे नहीं मिलेंगे। ऐसे समय में आपको खुद को और अधिक आगे बढ़ाना होगा, अपनी ट्रेनिंग पर ध्यान देना होगा और प्रोसेस पर भरोसा रखना होगा। यह एक दिन जरूर काम करेगा।”

 

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