जयपुर 16 जनवरी (वार्ता) राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद जयपुर में हुई यह पहली सेना दिवस परेड है जो हमारी सेना की जीत का जश्न है जिसमें ऑपरेशन सिंदूर में प्रयुक्त अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया है वहीं इस परेड को देखकर युवाओं के अंदर राष्ट्र प्रथम की भावना जागृत हुई है।
श्री शर्मा गुरुवार को 78वें सेना दिवस के अवसर पर सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित किए गए शौर्य संध्या कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की ताकत और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। इसने पूरी दुनिया को दिखाया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि सेना दिवस परेड यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की दूरदर्शी सोच को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जिसके तहत सैन्य आयोजनों को दिल्ली से बाहर ले जाकर देश की आम जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि वीरों की मातृभूमि राजस्थान में सेना दिवस परेड का आयोजन हुआ है तथा इसे एक उत्सव और राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया गया है।
उन्होंने कहा कि सेना दिवस परेड के लिए गत एक महीने में सम्मान दौड़, साइकिल रैली, कर्टन रेजर, चिकित्सा शिविर, अपनी सेना को जानिए, सेना दिवस परेड और शौर्य संध्या जैसे विविध आयोजनों ने जनमानस को सेना से सीधे जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों को 15 लाख से अधिक लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और करोड़ों लोगों ने डिजिटल माध्यमों से इसका साक्षात्कार किया। यह आयोजन देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और भारत की अदम्य शक्ति का प्रतीक है।
श्री शर्मा ने कहा कि राजस्थान शौर्य, भक्ति और शक्ति की भूमि है। राजस्थान को वीर सपूतों के लिए जाना जाता है। राजस्थान की धरती मां भारती की रक्षा करने में सदा तत्पर रही है। उन्होंने कहा कि देश की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा राजस्थान में है और यहां का हर घर सेना के प्रति समर्पण से भरा है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के योद्धाओं ने सदियों से भारत की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है।
बप्पा रावल से लेकर महाराणा प्रताप तक, राणा कुंभा, राणा सांगा और पृथ्वीराज चौहान जैसे महान योद्धाओं ने विदेशी आक्रमणकारियों को धूल चटाई। उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र विजेता पीरू सिंह, मेजर शैतान सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह जैसे वीर सपूतों ने राजस्थान का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के युवा राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, सैनिक स्कूल एवं रक्षा अकादमियों में बड़ी संख्या में चयनित होते हैं।
श्री शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। द्वितीय विश्व युद्ध के नॉन-पेंशनर पूर्व सैनिकों की पेंशन 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति महीना की गई है। उन्होंने कहा कि वीर बलिदानियों के सम्मान में 43 विद्यालयों का नामकरण और बीकानेर में शहीदों के आश्रितों को 750 बीघा भूमि का आवंटन किया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलवामा हमले में वीरगति प्राप्त केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के पांच कार्मिकों की आश्रित वीरांगनाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आवास प्रदान किए। पूर्व सैनिकों के लिए नया वेब पोर्टल और जिला स्तर पर 418 समाधान शिविरों का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि संविदा पर कार्यरत पूर्व सैनिकों के मानदेय में लगातार 10-10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है तथा ब्यावर, खैरथल-तिजारा एवं फलौदी में जिला सैनिक कल्याण कार्यालय स्थापित किये गये हैं।
सेना दिवस के अवसर पर आयोजित शौर्य संध्या में भारतीय सेना की शौर्य गाथा ने दर्शकों को रोमांच और गर्व से अभिभूत कर दिया। कार्यक्रम में नेपाल सेना के बैंड, पैरामोटर फ्लाईपास्ट तथा कलरीपयट्टु और मल्लखंब की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया वहीं ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित प्रस्तुति भी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। साथ ही भव्य ड्रोन शो में राष्ट्रीय और ऐतिहासिक विषयों पर आधारित मनमोहक आकृतियों को भी लोग एकटक निहारते रहे।
