भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक ऐसे खतरनाक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो पाकिस्तान और चीन के इशारों पर भारत में ‘साइबर स्लीपर सेल’ तैयार कर रहा है। जांच में खुलासा हुआ है कि दिल्ली के समयपुर बादली से पकड़ा गया मुख्य आरोपी ऋतिक सीधे पाकिस्तानी हैंडलरों के संपर्क में था और भारतीय क्रिप्टो ट्रेडर्स की यूपीआई आईडी (UPI ID) सीमा पार साझा कर रहा था। यह नेटवर्क डिजिटल अरेस्ट, इन्वेस्टमेंट फ्रॉड और क्रिप्टोकरेंसी स्कैम के जरिए न केवल आम नागरिकों को लूट रहा था, बल्कि जुटाए गए धन का उपयोग राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के लिए किए जाने की भी आशंका है।
जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक पाकिस्तान स्थित एडवांस्ड पर्सिस्टेंट थ्रेट (APT) ग्रुप्स ने भारत के रक्षा और सरकारी संस्थानों पर लगभग 16 लाख साइबर हमलों की कोशिश की है। ये ग्रुप खतरनाक रिमोट एक्सेस ट्रोजन और डेस्कटॉप लॉन्चर वाली फाइलें भेजकर गोपनीय डेटा चोरी करने का प्रयास कर रहे हैं। पुलिस ने ऑपरेशन के दौरान चीनी नागरिक चेन सहित सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 22 सिम बॉक्स और 20,000 से अधिक फर्जी सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। यह गिरोह ई-सिम डेटा का उपयोग कर बिलाल और नवाब जैसे पाकिस्तानी हैंडलरों के साथ मिलकर भारत के डिजिटल ढांचे को अस्थिर करने में जुटा था।
इस ₹100 करोड़ के बड़े स्कैम का खुलासा होने के बाद सरकार ने नागरिकों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये साइबर स्लीपर सेल लालच देकर लोगों के बैंक खाते खुलवाते हैं और फिर उन खातों का उपयोग अवैध ट्रांजैक्शन के लिए करते हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध वीडियो कॉल या ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट के झांसे में न आएं। यदि कोई साइबर धोखाधड़ी का शिकार होता है, तो वह तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या Cybercrime.gov.in पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट दर्ज कराएं। एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि यह केवल धोखाधड़ी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा डिजिटल युद्ध है।

