इंदौर: शहर में सरकारी राजस्व को करोड़ों की चपत लगाने वाले फर्जी शराब चालान घोटाले में ईडी की कार्रवाई तेज हो गई है. विशेष न्यायालय (पीएमएलए) ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दायर अभियोजन शिकायत पर संज्ञान ले लिया है.प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दी गई अधिकृत जानकारी के अनुसार इंदौर सब ज़ोनल ऑफिस ने लिकर फेक चालान स्कैम में 29 नवंबर को पीएमएलए के तहत अभियोजन शिकायत दाखिल की थी, जिस पर विशेष अदालत ने 11 दिसंबर को संज्ञान ले लिया.
यह जांच राऊजी बाजार थाने में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें कई ठेकेदारों पर ट्रेजरी चालानों के जरिए सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाने का आरोप है. जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कम राशि के चालान बैंक में जमा कराए, लेकिन चालान के कॉलम में राशि शब्दों में खाली छोड़ दी. बाद में उसी चालान में अंकों में राशि को बढ़ाकर मिलान करते हुए शब्दों में भी बढ़ी हुई रकम भर दी जाती थी.
इन परिवर्तित चालानों को देसी शराब वेयरहाउस या जिला आबकारी कार्यालय में जमा कर अधिक स्टॉक की एनओसी हासिल की जाती थी, जबकि असल में बेहद कम ड्यूटी जमा की गई थी. इस तरीके से सरकारी कोष को बड़ा नुकसान पहुंचाया. पीएमएलए जांच में यह तथ्य भी स्थापित हुआ कि राजू दशवंत, अंश त्रिवेदी सहित अन्य ठेकेदारों ने करीब 49 करोड़ रुपए से अधिक की अवैध कमाई को छिपाने और उपयोग में लाने की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई.
ईडी इन दोनों मुख्य आरोपियों को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है और वे न्यायिक हिरासत में हैं. जांच के दौरान ईडी ने 28 नवंबर को 28 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया था, जिनकी खरीद कीमत 21.18 करोड़ और मौजूदा बाजार कीमत 70 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है. मामले की आगे की जांच की जा रही है.
