
शाजापुर। जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। गुरुवार को मातृ एवं शिशु भवन में सोनोग्राफी कराने पहुंचे मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। तय समय पर सोनोग्राफी करने वाले डॉक्टर के उपस्थित न होने से गर्भवती महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ा, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
महुपुरा निवासी कान्हा जाटव अपनी पत्नी की सोनोग्राफी कराने जिला अस्पताल पहुंचे थे। करीब एक घंटे तक वे सोनोग्राफी कक्ष के बाहर बैठे रहे, लेकिन डॉक्टर नहीं पहुंचे। पूछताछ केंद्र पर भी कर्मचारियों द्वारा संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। परेशान होकर परिजनों ने अव्यवस्थाओं का वीडियो बनाना शुरू किया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल पुलिस चौकी भेज दिया गया।
स्थिति से असंतुष्ट होकर कान्हा जाटव ने सिविल सर्जन से संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन वहां भी उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। स्टाफ की कमी का हवाला दिया गया। इसके बाद उन्होंने सीएमएचओ डॉ. कमला आर्य को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी। सूचना मिलते ही सीएमएचओ स्वयं जिला अस्पताल पहुंचीं और मातृ एवं शिशु भवन का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ अनुपस्थित मिले। जहां ड्यूटी होनी चाहिए थी, वहां ताले लटके हुए पाए गए। सुरक्षा व्यवस्था भी कमजोर नजर आई। सोनोग्राफी कक्ष सहित अन्य विभागों में भी डॉक्टरों की गैरमौजूदगी सामने आई।
इसी दौरान सिविल सर्जन डॉ. बी.एस. मीणा भी अस्पताल पहुंचे। सीएमएचओ ने ड्यूटी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई और कहा कि संबंधित अधिकारियों को यह जानकारी होनी चाहिए कि किस डॉक्टर की कहां ड्यूटी लगी है। इस दौरान दोनों अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
जिला अस्पताल में लगातार सामने आ रही ऐसी अव्यवस्थाओं से मरीजों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बावजूद समय पर इलाज और जांच नहीं मिल पा रही है। डॉक्टरों की अनुपस्थिति और व्यवस्थागत लापरवाही ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका सीधा असर आम मरीजों पर पड़ रहा है।
