नई दिल्ली | 12 जनवरी, 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने सोमवार सुबह 10:18 बजे श्रीहरिकोटा से साल 2026 का पहला महत्वपूर्ण मिशन PSLV-C62 लॉन्च किया। हालांकि, उड़ान के अंतिम चरणों में आई तकनीकी गड़बड़ी के कारण मिशन पूर्णतः सफल नहीं हो सका। इसरो द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, रॉकेट के तीसरे चरण (PS3 Stage) के अंत में कुछ अनपेक्षित विसंगतियां देखी गईं, जिसके कारण मुख्य सैटेलाइट ‘अन्वेषा’ और अन्य 14 उपग्रह निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं हो सके। इसरो की तकनीकी टीम डेटा का विस्तृत विश्लेषण कर रही है ताकि गड़बड़ी के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट (EOS-N1) ‘अन्वेषा’ था, जिसे भारत का “आकाश में सीसीटीवी” कहा जा रहा है। डीआरडीओ (DRDO) द्वारा विकसित यह हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग सैटेलाइट दुश्मनों के बंकरों, जंगलों में छिपे आतंकियों और सीमा पार होने वाली संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए बनाया गया है। यह सैटेलाइट 600 किलोमीटर की ऊंचाई से ऐसी तस्वीरें लेने में सक्षम है, जिससे ड्रग्स और हथियारों की तस्करी को रोकना आसान हो जाता। सेना के लिए यह एक सीक्रेट वेपन की तरह काम करने वाला था।
PSLV की यह 64वीं उड़ान थी, जिसमें भारत के अन्वेषा के अलावा फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और ब्रिटेन जैसे देशों के 14 छोटे उपग्रह भी शामिल थे। पीएसएलवी को इसरो का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है, जिसने पहले चंद्रयान-1 और मंगलयान जैसे ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस तकनीकी विफलता को भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए एक अस्थाई झटका माना जा रहा है। इसरो प्रमुख ने वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा है कि विफलता के कारणों का अध्ययन कर भविष्य के मिशनों को और अधिक पुख्ता बनाया जाएगा।

