महाराष्ट्र चुनाव में स्याही विवाद: मार्कर पेन के इस्तेमाल पर चुनाव आयोग की सफाई

मुंबई, जनवरी 15 (वार्ता) महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने यह शिकायत मिलने के बाद कि इस बार मतदाओं को लगायी जाने वाली ‘मार्कर स्याही’ मिट जा रही है, उसने इसका बचाव करते हुए पुराने फैसले का हवाला दिया है। आयोग के अधिकारी ने कहा कि उंगलियों पर मार्कर से स्याही लगाने का निर्देश 2011 में ही जारी किया गया था और यह सुनिश्चित करने को कहा गया था कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय मौजूद रहे, ताकि कोई व्यक्ति दोबारा मतदान न कर सके।

मुंबई के गोरेगांव, अंधेरी, मलाड, पवई और कांदिवली के कई बूथों के मतदाओं ने आरोप लगाया कि मतदान के बाद चुनाव अधिकारियों ने उंगलियों पर स्याही लगाने के लिए साधारण मार्कर का इस्तेमाल किया। सिर्फ सरकार की बनायी हुई कभी न मिटने वाली स्याही इस्तेमाल करने के आम तरीके से इस तरह के बदलाव के बारे में पहले से कोई जानकारी न होने पर मतदाताओं ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाया। कोल्हापुर जिले और पुणे से भी वोटरों की उंगलियों पर लगी स्याही के निशान आसानी से मिटने की ऐसी ही घटनाएं सामने आयीं।

वोटरों की शिकायतों पर महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा, “वोटर्स की उंगलियों पर ‘पक्की स्याही’ लगाने के लिए मार्कर के इस्तेमाल के बारे में 19 नवंबर 2011 और 28 नवंबर 2011 को आदेश जारी किये गये थे। तब से स्थानीय निकाय चुनाव में मतदान बाद के निशान के लिए मार्कर का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन आदेशों के मुताबिक, मार्कर से स्याही को नाखून और नाखून के ऊपर की स्किन पर तीन-चार बार रगड़-रगड़कर साफ-साफ लगाना है, ताकि निशान साफ दिखे। ये निर्देश मतदान के दौरान इस्तेमाल होने वाले मार्कर पर भी अंकित होते हैं।”

महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग ने कहा, “इन कदमों के मद्देनजर आयोग मतदाताओं से अपील करता है कि वे स्याही हटाने की कोशिश जैसी कोई भी गलत हरकत न करें और चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता बनाये रखें। दुविधा पैदा करने या दोबारा वोट देने की कोशिश करने के इरादे से मतदाताओं की उंगली पर लगी स्याही को हटाने की कोशिश करने पर कानूनन सजा का प्रावधान है। अगर कोई व्यक्ति स्याही हटाने के बाद दोबारा मत डालने की कोशिश करता पाया जाता है तो उस मतदाता के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जायेगी।”

आयोग ने कहा, “अगर कोई मतदाता स्याही मिटा भी लेता है, तो दोबारा मतदान संभव नहीं है। पहले से ही काफी सुरक्षा उपाय मौजूद हैं, क्योंकि मतदाताओं के मत डालने के बाद उसका रिकॉर्ड रखा जाता है। इसलिए, सिर्फ स्याही हटाने से मतदाता दोबारा वोट नहीं डाल सकता।”

इससे पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को नागपुर में मत डालने के बाद मीडिया से बात करते हुए आयोग के अधिकारियों के आम मार्कर के इस्तेमाल का बचाव करते हुए कहा, “ये सभी चीजें चुनाव आयोग तय करता है। मार्कर का इस्तेमाल पहले भी कई बार हो चुका है। अगर किसी को इस पर एतराज है तो चुनाव आयोग को इस पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन मुझे लगता है कि कुछ लोग जानबूझकर आज ही कुछ चीजों पर प्रतिक्रिया कर रहे हैं, कल के नतीजों का अनुमान लगा रहे हैं। इससे साफ पता चलता है कि वे (विपक्षी पार्टियां) कल के नतीजों के बाद किसी पर इल्जाम लगाने की तैयारी कर रहे हैं।”

इसके मद्देनजर आम आदमी पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष रुबेन मैस्करेन्हास ने गुरुवार को मुंबई में मतदान शुरू होने के कुछ घंटों बाद महाराष्ट्र राज्य चुनाव आयोग के खिलाफ आधिकारिक शिकायत दर्ज कराया।

श्री मैस्करेन्हास ने एक्स पर वीडियो के साथ ट्वीट किया, “जैसा मैं इस वीडियो में दिखा रहा हूं, सरकार निर्मित ‘अमिट स्याही’ के बजाय मार्कर के उपयोग से मतदाताओं की उंगलियों पर निशान बनाये जा रहे हैं, जिन्हें ‘नेल पॉलिश रिमूवर’ से आसानी से मिटाया जा सकता है। यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है। चुनावों को मजाक में बदला जा रहा है,”

गुरुवार को दादर के बालमोहन विद्यालय मतदान बूथ पर मतदान के बाद मीडियाकर्मियों से बात करते हुए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के संस्थापक और प्रमुख राज ठाकरे ने भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जतायी, “पूरी प्रशासनिक मशीनरी सत्तारुढ़ पार्टी को जिताने के लिए काम कर रही है। मतदान प्रक्रिया में मतदाताओं की उंगलियों पर पहले जो स्याही लगायी जाती थी, उसकी जगह अब मतदाताओं की उंगलियों पर मार्कर से स्याही लगायी जा रही है। हैंड सैनेटाइजर के उपयोग से यह स्याही मिट रही है। हम इसे रोकने के लिए काम कर रहे हैं। इस तरीके से सत्ता में आना जीत नहीं कहलाता।”

श्री राज ठाकरे ने कहा, “सत्तारुढ़ पार्टी ने किसी भी तरीके से चुनाव जीतने का निर्णय लिया है। जब हमने दो बार मतदान करने वाले मतदाताओं का मुद्दा उठाया तो चुनाव आयोग ने कहा कि उन्हें इससे कोई लेना-देना नहीं है। हमने वीवीपैट मशीनों का मुद्दा भी उठाया, लेकिन इस बार यहां कोई वीवीपैट मशीन नहीं हैं। इसलिए हमें नहीं पता कि हमने जिसे मत दिया है, वह हमारे उम्मीदवार को गया या नहीं।”

अब चुनाव आयोग ने प्रिंटिंग ऑक्सिलरी डिस्प्ले यूनिट (पीएडीयू) मशीनें भी लगा दी हैं। राज ठाकरे ने कहा, “इन पीएडीयू मशीनों का इस्तेमाल मतों की गिनती के दौरान किया जायेगा। सरकार ने तय कर लिया है कि कोई भी विपक्षी दल बचना ही नहीं चाहिए।”

एक और घटनाक्रम में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले शिव सेना युवा शाखा (युवा सेना) के पदाधिकारी साइनाथ दुर्गे ने भी आरोप लगाया कि इस बार मार्कर स्याही का उपयोग किया जा रहा है, जिससे मतदाताओं की उंगली पर स्याही के निशान आसानी से मिट रहे हैं।

श्री दुर्गे ने कहा, “मतदाताओं की उंगलियों पर लगायी जाने वाली स्याही इतनी आसानी से नहीं मिटती। यह कई दिनों तक रहती है, लेकिन इस बार साधारण मार्कर का उपयोग किया जा रहा है, जिस कारण स्याही के निशान थिनर के उपयोग से भी मिट जा रहे हैं। यह फर्जी और कईं बार मतदान करने वालों को रोकने के लिए नाकाफी है।”

इसी बीच बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) के आयुक्त भूषण गगरानी ने भी माना कि उंगलियों पर मार्कर से निशान लगाने के बाद नाखून पर लगी स्याही मिट जाती है।

श्री गगरानी ने मतदाताओं के आरोपों के जवाब में कहा, “हम सभी शिकायतों की जांच करेंगे। प्रारंभिक निरीक्षण यह है कि नाखून पर लगायी गयी स्याही मिट जाती है, लेकिन त्वचा पर लगी स्याही नहीं मिटती।”

कोल्हापुर जिले के कर्मवीर इंग्लिश मीडियम स्कूल के एक मतदान केंद्र से भी मतदाताओं की उंगलियों पर स्याही के निशान आसानी से मिटने की समान घटना रिपोर्ट की गयी है।

पुणे में कई मतदाताओं ने आरोप लगाया है कि मतदान के बाद उनकी उंगलियों पर लगायी गयी स्याही लगभग तुरंत ही मिट गयी। धायरी क्षेत्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) के कार्यकर्ताओं ने कथित तौर पर मतदान के बाद अपनी उंगली से स्याही हटाने की कोशिश करने वाले एक व्यक्ति की पिटाई की।

राकांपा कार्यकर्ता ने बताया, “एक व्यक्ति ने मतदान के बाद खुलकर स्याही हटाने की कोशिश की। जब मैंने उसे पकड़ने की कोशिश की तो कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने उसे बचाने की कोशिश की। मैंने पूरी घटना फोन में रिकॉर्ड कर ली है और मैं शिकायत दर्ज कराऊंगा। मैं नहीं जानता, उसने दो बार मत देने की कोशिश की या नहीं, लेकिन कोई स्याही हटाने की कोशिश क्यों करेगा?”

पुणे के कई, खास कर सिंहगढ़ रोड क्षेत्र के मतदाताओं ने कहा कि मार्कर स्याही के निशान आसानी से हटाये जा सकते हैं और यह सवाल उठाया कि अधिकारी फर्जी मतदान और दो बार मतदान करने वालों को कैसे रोकेंगे?

कुछ महिला मतदाताओं ने बताया, “मेरे पति ने वार्ड नंबर 35 में मतदान किया। मतदान के बाद उनकी उंगली पर लगा निशान आसानी से मिट गया। इस बात की गारंटी कौन दे सकता है कि कोई व्यक्ति एक से अधिक बार मतदान नहीं करेगा?”

महिला मतदाता ने कहा, “हमें एक और समस्या का सामना करना पड़ रहा है। हम तीन का परिवार हैं। मेरे पति और मेरे 25 वर्षीय बेटा एक ही घर में रहते हैं। फिर भी हमारे मतदान केंद्र अलग हैं। मेरे पति को वाॅर्ड 35 मिला और मेरा वाॅर्ड 34 है। हम यह नहीं समझ पा रहे हैं कि इन आवंटनों के लिए क्या आधार बनाया गया है।”

 

 

Next Post

बच्चों को संस्कारवान बनाएं, पानी-बिजली की बचत करें : रामदत्त

Thu Jan 15 , 2026
ग्वालियर। देश में केवल संपत्ति बढ़ाने से ही काम नहीं चलेगा, हमें बच्चों को संस्कारित और चरित्रवान भी बनाना पड़ेगा। सभी को पानी और बिजली की बचत कर अपने नागरिक कर्तव्य का पालन करना चाहिए। साथ ही सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए अपने घरों में दैनिक कार्य करने वाले जैसे […]

You May Like