युवाओं के मजबूत इरादों से होगा विकसित भारत का निर्माण : मोदी

नयी दिल्ली, (वार्ता) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि देश के युवाओं का आत्मविश्वास विकसित भारत के निर्माण का आधार है इसलिए युवा पीढ़ी को अपने पूरे सामर्थ्य के साथ 2047 के विकसित भारत के स्वर्णिम अवसरों के लिए मजबूत इरादों के साथ खड़ा होने की जरूरत है।

प्रधानमंत्री ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ के दूसरे सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए सोमवार को यहां कहा कि उन्हें देश के युवाओं के सामर्थ्य पर अटूट भरोसा है। उन्हें पूरा विश्वास है कि देश का युवा दृढ़ता के साथ विकसित भारत की यात्रा का जिम्मेदार आधार बनेगा और आजादी के 100 साल पूरे होने पर 2047 में देश के चौहमुखी विकास में अवसरों के स्वर्णिम द्वारा सबके लिए खुलेंगे और भारत एक मजबूत और सशक्त विकसित राष्ट्र होगा।

श्री मोदी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा “जब मैंने पहली बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, तब मैं समझता हूं आप में से बहुत सारे युवा ऐसे होंगे, जिनका जन्म भी नहीं हुआ होगा और जब मैंने 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी, तब आप में से ज्यादातर लोगों को बच्चा कहा जाता होगा। लेकिन पहले मुख्यमंत्री के रूप में और फिर अभी प्रधानमंत्री के रूप में, मुझे हमेशा युवा पीढ़ी पर बहुत ज्यादा विश्वास रहा है। आपका सामर्थ्य, आपका टैलेंट, मैं हमेशा आपकी एनर्जी से, खुद भी एनर्जी पाता रहा हूं। और आज देखिए, आज आप सभी विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर थामे हुए हैं।”

उन्होंने कहा कि 2047 में आजादी के 100 साल की यात्रा अहम है। उस समय हमारे युवाओं के जीवन के लिए यह स्वर्णिम अवसर होगा और युवाओं का सामर्थ्य देश का सामर्थ्य बनेगा जिससे देश नई ऊंचाई पर पहुँचेगा। स्वामी विवेकानंद की आज जयंती है और उनके विचार आज भी हर युवा के लिए प्रेरणा हैं। हमारे हर प्रयास में समाज का,देश का हित हो, इस दिशा में स्वामी विवेकानंद का जीवन हम सबके लिए बहुत बड़ा मार्गदर्शक और प्रेरक है। उनका कहना था कि स्वामी विवेकानंद का स्मरण करते हुए, हर साल 12 जनवरी को देश राष्ट्रीय युवा दिवस मनाता है और इसीलिए आज के दिन को विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के लिए चुना गया है।

श्री मोदी ने भारत यंग लीडर्स डायलॉग की प्रशंसा करते हुए कहा “मुझे खुशी है कि बहुत ही कम समय में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग इतना बड़ा प्लेटफॉर्म बन गया है। एक ऐसा प्लेटफॉर्म, जहां देश के विकास की दिशा तय करने में युवाओं की सीधी भागीदारी होती है। करोड़ों नौजवानों का इससे जुड़ना, 50 लाख से अधिक नौजवानों की रजिस्ट्री, 30 लाख से अधिक युवाओं का विकसित भारत चैलेंज में हिस्सा लेना, देश के विकास के लिए अपने विचार शेयर करना, इतने बड़े स्केल पर युवाशक्ति का एंगेज होना, अपने आप में अभूतपूर्व है। मैंने जब अभी आपसे बातचीत शुरू की तो 2014 का जिक्र किया था। तब यहाँ बैठे ज़्यादातर युवा 8–10 साल के ही रहे होंगे। आपने पॉलिसी पैरालिसिस का वो पुराना दौर नहीं देखा, जब उस समय की सरकार की इसलिए आलोचना होती थी कि वो समय पर फैसले नहीं लेती।नियम-कायदे ऐसे थे, जिससे हमारा नौजवान कुछ नया करने के बारे में सोच भी नहीं सकता था। हालत ये थी कि जॉब के लिए अप्लाई करना होता था, तो सर्टिफिकेट अटेस्ट कराने के लिए अफसरों और नेताओं के साइन लेने में ही दम निकल जाता था। फिर फीस का डिमांड ड्राफ्ट बनाने के लिए बैंकों और पोस्ट-ऑफिस के चक्कर लगाने पड़ते थे। अपना कोई बिजनेस शुरु करना होता था, तो बैंक कुछ हज़ार रुपए के लोन के लिए 100 गारंटी मांगते थे। आज ये बातें बहुत असामान्य लगती हैं, लेकिन एक दशक पहले तक यही सबकुछ चलता था।”

उन्होंने कहा कि दुनिया में 50-60 साल पहले स्टार्ट अप कल्चर शुरु हुआ लेकिन इस दौरान भारत में स्टार्ट अप्स की बहुत कम चर्चा होती थी। साल 2014 तक तो देश में 500 से भी कम रजिस्टर्ड स्टार्ट-अप हुआ करते थे। हमने युवाओं को ध्यान में रखते हुए, एक के बाद एक नई स्कीम्स बनाई, इसका जो प्रभाव हुआ, वो भी एक अलग ही सफलता की कहानी बन गया है। अंतरिक्ष क्षेत्र को ही लीजिए, 5-6 साल पहले तक इसकी जिम्मेदारी सिर्फ इसरो पर थी आज स्पेस सेक्टर में 300 से अधिक स्टार्ट-अप्स काम कर रहे हैं। पहले रक्षा क्षेत्र सरकारी कंपनियों पर ही निर्भर था लेकिन उनकी सरकार ने इसको भी बदला और इसके लिए निजी क्षेत्र के दरवाजे खोले। आज भारत में 1000 से अधिक डिफेंस स्टार्ट अप्स काम कर रहे हैं। डिजिटल इंडिया ने भी भारत ने नयी तरह से तरक्की की है। जीएसटी आज क्रांति बन चुका है और 12 लाख तक के लोगों को टैक्स से मुक्ति मिली है।शिक्षा नीति के बाद इससे हमारे हज़ारों आईटीआई अपग्रेड किए जाएंगे, ताकि युवाओं को इंडस्ट्री की वर्तमान और भविष्य की ज़रूरतों के हिसाब से ट्रेन किया जा सके।

श्री मोदी ने आत्मविश्वास को महत्व देते हुए कहा “कोई भी देश बिना आत्मविश्वास के आत्मनिर्भर नहीं हो सकता, विकसित नहीं हो सकता।अपने सामर्थ्य, अपनी विरासत,अपने साजो-सामान पर गौरव का अभाव, हमें खलता है इसलिए हमें बड़ी मजबूती के साथ, गौरव के साथ मजबूत कदमों से आगे बढ़ना चाहिए। आपने ब्रिटिश राजनेता मैकाले के बारे में ज़रूर पढ़ा होगा, उसने गुलामी के कालखंड में शिक्षा-तंत्र के माध्यम से भारतीयों की ऐसी पीढ़ी बनाने के लिए काम किया, जो मानसिक रूप से गुलाम हो। युवा पीढ़ी को आज दुनिया की हर बेस्ट प्रेक्टिस से सीखना है, लेकिन अपनी विरासत, अपने आइडियाज़ को कमतर आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी नहीं होने देना है। स्वामी विवेकानंद जी का जीवन हमें यही तो सिखाता है। उन्होंने दुनियाभर में भ्रमण किया, वहां की अच्छी बातों की प्रशंसा की लेकिन भारत की विरासत को लेकर फैलाए गए भ्रम को तोड़ने का निरंतर प्रयास किया। उन्होंने कुरीतियों को चैलेंज किया क्योंकि वह एक बेहतर भारत बनाना चाहते थे और आज उसी स्पिरिट के साथ युवाशक्ति को आगे बढ़ना है। और यहां, अपनी फिटनेस का भी ध्यान रखना है, खेलना है, खिलखिलाना है। मुझे आप सभी पर अटूट भरोसा है। आपका सामर्थ्य,आपकी ऊर्जा पर मेरा विश्वास है।”

 

 

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