विदिशा का दुल्हा पांढुरना की दुल्हन ने सेवाग्राम के वर्धा में महात्मा गांधी के आश्रम में किया विवाह

पांढुरना:आज के भौतिकवादी समाज में जब शादियां विलासितापूर्ण वातावरण में परंपरा के नाम पर कुछ नए अवलंबनों को ओढ़ कर रची जा रही हैं। आम आदमी को शादी के नाम पर ठगा जा रहा है, दिखावे की संस्कृति ने समाज को लूट और कर्ज के बोझ तले दबाया है। ऐसे में मोहन और गीता ने बड़े ही सादगीपूर्ण तरीके व शालीनता भरे परिवेश बापू के आंगन सेवाग्राम आश्रम वर्धा से अपनी सहजीवन यात्रा की शुरुआत की।

महात्मा गांधी ने अपने जीवन काल में यह तय किया था कि वह उन शादियों में ही भाग लेंगे जो मानवीयता में श्रद्धा रखते हुए जाति और धर्म के परे बड़े ही सहज और सादगी पूर्ण तरीके से आयोजित की जाएंगी। ऐसी शादियों में जाति, धर्म के बंधन और दहेज का स्थान नहीं होगा। महात्मा गांधी के जाने के बाद गांधियन समाज में यह परंपरा जारी रही। गांधीवादी कार्यकर्ताओं का विवाह भी बापू कुटी में इस तरीके से होता रहा लेकिन पिछले कुछ समय से इस परंपरा पर विराम लगने के बाद मोहन और गीता की शादी से एक नई दिशा मिली है।

कोई रस्म नहीं, कोई रिवाज नहीं बस खाली खादी के कपड़े व सूतमाला। 9 जनवरी को उपवास रखकर ब्रह्म मुहूर्त में बापू कुटी में प्रार्थना, गीता पाठ व भजन किया। उसके पश्चात गौशाला में गाय का गोबर उठाया और आश्रम परिसर में श्रमदान किया। ठीक 11:30 बजे बापू की चरण रज से सिंचित बापू कुटी के सामने मुक्त आकाश में सार्वजनिक रूप से सामान्य बिछायत व कुर्सी पर बराबरी से बैठकर सहजीवी बने। आज भी यह आंगन बा व बापू के द्वारा लगाए गए पेड़ की छाया से आच्छादित है मानो बापू का वरदहस्त सभी को मिल रहा हो।

सर्वधर्म प्रार्थना को सभी धर्मों की भाषा हिंदी, पारसी अंग्रेजी संस्कृत उर्दू में पढ़ा गया और उसके बाद बापू का प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेने कहिए आदि जालंधर भाऊ पंडित चंनोले सिद्धेश्वर भाई व मालती ताई ने प्रस्तुत किया। प्रार्थना के पश्चात बापू के प्रपौत्र राजमोहन जी गांधी द्वारा मोहन जी और गीता जी को संप्रेषित संदेश का वाचन किया गया। गांधी स्मारक निधि के केंद्रीय सचिव संजय सिंह ने मोहन और गीता का परिचय उपस्थित परिजनों परिजनों व सामाजिक नागरिक जनों से कराया। उन्होंने बताया कि गीता (गौरी) कांग्रेस की लीडरशिप को मूल्यों से जोड़ कर गांधी के समय की कांग्रेस बनाने का सपना देखती है। मोहन और गांधी में नाम की समानता है दोनों का व्यवसाय एडवोकेसी का है। दोनों गांधी विचार के साथी हैं और हमारे भोपाल में गांधी भवन न्यास एवं मध्य प्रदेश सर्वोदय मंडल के मजबूत कार्यकर्ता हैं।  मध्य प्रदेश सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष चिन्मय मिश्र ने गांधीयन विवाह पद्धति की अवधारणा को प्रस्तुत किया उन्होंने बापू के बेटे रामदास गांधी के विवाह कार्यक्रम का संदर्भ भी साझा किया।
तत्पश्चात मोहन और गीता ने अपनी सहजीवन यात्रा के लिए खुद से तैयार किए नो वचनों को समाज के वरिष्ठजनों समुदाय के प्रतिनिधियों के माध्यम से धारण कर सहमति प्रदान की। प्रथम वचन का वाचन श्री चंदन पाल, द्वितीय वचन सुश्री मीनाक्षी नटराजन, तृतीय वचन सचिन राव, चतुर्थ वचन भवर मेघवंशी, पांचवा वचन श्री चिन्मय मिश्र, छठवां वचन वीरेन भूटा, सातवां वचन चतुर्भुज अहीर, आठवां वचन श्री यश दा, नवां वचन श्री सज्जाद ने धारण कराया।
उक्त वचनों पर गीता व मोहन ने अपनी सहमति प्रदान की। सुश्री मीनाक्षी नटराजन ने दोनों को अपने हाथ से काती सूतमाला भेंटकर पहनाने का आग्रह किया। इस प्रकार दोनों ने एक दूसरे को सूतमाला पहनाकर नौ वचन धारणकर सहअस्तित्व एवं गरिमा पूर्ण जीवन जीने हेतु सत्य व संविधान को साक्षी मानकर नए जीवन की शुरुआत की। उपस्थित जन समुदाय ने खड़े होकर, ताली बजाकर अभिनंदन और स्वागत किया और एक स्वर में शुभ मंगल हो शुभ मंगल हो ,,,,,, गीत गाया।

सेवाग्राम आश्रम प्रतिष्ठान के सचिव विजय तांबे ने प्रशस्ति पत्र पढ़कर दोनों को सप्रेम भेंट किया।तत्पश्चात उपस्थित जनसमुदाय ने अपना आशीर्वाद देकर इन स्मृतियों को संजोने फोटो क्लिक किया।प्रकाश एवं धर्मेश ने उपस्थित जन समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया तत्पश्चात सभी ने मिलकर सहभोज किया। परिवार ने परस्पर इस आयोजन की बधाई और आभार ज्ञापित किया।
इस वेला पर आनंद का जो उत्साह बिखरा था वह राहगीरों से लेकर प्रत्येक उस इंसान को गर्भित कर रहा था जिनके जीवन में मानवीयता सर्वोपरि है। यह दिन गीता जी और मोहन जी के लिए तो हमेशा अमिट स्मृतिपूर्ण रहेगा ही साथ ही इस दिन को मानवीय मूल्यों को श्रेष्ठता प्रदान करने वाले अवसरों में भी गिना जाएगा।

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