इंदौर: वन मंडल में तेंदुओं सहित अन्य वन्यजीवों की संख्या लगातार बढ़ने के साथ रेस्क्यू और इलाज की जरूरत भी बढ़ती जा रही है. इसी को देखते हुए अब वन विभाग इंदौर में खुद का रेस्क्यू सेंटर खोलने की तैयारी में जुट गया है, ताकि घायल और बीमार वन्यजीवों के इलाज व रखरखाव में किसी तरह की परेशानी न हो.डीएफओ प्रदीप मिश्रा के मुताबिक बीते कुछ वर्षों में तेंदुओं और अन्य वन्यजीवों के रेस्क्यू ऑपरेशन के मामले तेजी से बढ़े हैं. अभी तक रेस्क्यू के बाद घायल तेंदुओं और वन्यजीवों के इलाज व इलाज के दौरान उनके रखरखाव के लिए वन विभाग को कमला नेहरू प्राणी संग्रहालय पर निर्भर रहना पड़ता है.
वन विभाग की रेस्क्यू टीम को केवल इंदौर वन मंडल ही नहीं, बल्कि महू, चोरल, मानपुर, इंदौर सहित संभाग के अन्य जिलों में भी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए जाना पड़ता है. रेस्क्यू की बढ़ती संख्या के चलते अब विशेषज्ञ वाइल्ड लाइफ डॉक्टरों और पर्याप्त सुविधाओं की कमी महसूस की जा रही है. आंकड़ों के मुताबिक बीते पांच साल में इंदौर वन मंडल की रेस्क्यू टीम अब तक 67 तेंदुओं का सफल रेस्क्यू कर चुकी है. इसी अनुभव और बढ़ते दबाव को देखते हुए वन विभाग ने इंदौर में अपना अलग रेस्क्यू सेंटर स्थापित करने का निर्णय लिया है, जिससे भविष्य में घायल और बीमार वन्यजीवों का समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा सकेगा.
