नई दिल्ली | 12 जनवरी, 2026: ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों और तनावपूर्ण माहौल के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक चौंकाने वाला दावा किया है। एयर फोर्स वन में मीडिया से चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरानी सरकार के बड़े नेताओं ने उनसे संपर्क किया है और वे अब बातचीत की मेज पर आने को बेताब हैं। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब ट्रंप ने हाल ही में ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि प्रदर्शनकारियों पर हिंसक कार्रवाई नहीं रुकी, तो अमेरिका सीधे सैन्य हमला कर सकता है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरानी पक्ष की ओर से फोन आया है और जल्द ही एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की यह पहल अमेरिका के उस दबाव का नतीजा है, जो उसने वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को सत्ता से हटाकर पूरी दुनिया को दिखाया था। ट्रंप ने बैठक के संकेतों के साथ यह भी कहा कि बातचीत से पहले “कार्रवाई” की आवश्यकता हो सकती है, जो ईरान पर निरंतर सैन्य दबाव बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है। क्या ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई अमेरिका के साथ समझौता कर संभावित हमले को टालने की कोशिश कर रहे हैं? इस सवाल ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में नई बहस छेड़ दी है, क्योंकि ईरान अब तक अमेरिका को कड़ा जवाब देने की बात कहता रहा था।
दूसरी ओर, ईरान के भीतर स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने राष्ट्रीय एकता की अपील करते हुए अमेरिका पर आर्थिक युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है। उन्होंने स्वीकार किया कि 80% प्रदर्शनकारियों की मांगें जायज हैं, लेकिन दंगाइयों को उन्होंने विदेशी एजेंट करार दिया। पेजेशकियान ने जनता से अपील की है कि वे बाहरी हस्तक्षेप के खिलाफ सरकार का समर्थन करें। हालांकि, ट्रंप के ताजा दावे ने ईरानी सरकार के भीतर की घबराहट को उजागर कर दिया है, जिससे यह साफ है कि ईरान अब चौतरफा संकट से घिर चुका है।

