इंदौर: सबसे स्वच्छ शहर के दावों के बावजूद, शहर के कई वार्डों की जमीनी हकीकत अलग है, जहां बैक लाइन और घरों के बीच की सेंटर गलियों में भारी गंदगी का ढेर, उफनते चेंबर और चोक सीवरेज लाइनों के कारण लोगों के घरों में दूषित पानी पहुंच रहा है, जिससे भागीरथपुरा जैसी स्वास्थ्य आपदा का खतरा है और यह स्थिति स्वच्छ सर्वेक्षण में नंबर वन आने वाले शहर के लिए चिंताजनक है.सफाई को लेकर वार्ड क्रमांक 30 में भी बड़ी लापरवाही देखने को मिली है, बर्फानी घाम रोड क्षेत्र में पडऩे वाले इस वार्ड की कृष्णबाग कॉलोनी में पहुंचते ही दुर्गंध आने लगती है, जो घरों की बैक लाईन में लगे कचरे के ढेरों से आ रही थी.
बैक लाईन में इतनी गंदगी भरी हुई थी कि उसका गंदा पानी भी सडक़ों पर बहता दिखाई दिया. चेंबर की हालत भी बेहद दयनीय थी. यहां के चेंबर पूरी तरह चोक होकर ओवरफ्लो हो रहे थे. रहवासियों से बात करने पर पता चला कि क्षेत्र में सफाई करने कोई कर्मचारी नियमित नहीं आता. जब शिकायत की जाती है, तभी सफाईकर्मी आते हैं और थोड़ा-बहुत साफ कर चले जाते हैं. क्षेत्र में सीवरेज लाईन का बार-बार चोक होना आम बात है. चेंबर बारहों महीने बहते रहते हैं, जो बड़ी लापरवाही का नतीजा है. कई चेंबर तो क्षतिग्रस्त हो चुके हैं, जिनकी मरम्मत तक नहीं की जाती. भागीरथपुरा की घटना में दूषित पानी के कारण आई स्वास्थ्य आपदा को लेकर जो कारण सामने आया है, वह सीवरेज लाईन से रिसाव बताया जाता है और ऐसे ही हालातों की ओर कृष्णबाग कॉलोनी भी बढ़ रही है.
यह बोले रहवासी
बैक लाईन तो छोडि़ए सफाईकर्मी सिर्फ गली के मुहाने की ही सफाई कर इतिश्री कर लेते हैं. गंदगी के कारण चौबीसों घंटे बदबू आती है, जिनके घर गली से लगे हुए हं,ै उन्हें तो दरवाजा बंद करके रहना पड़ता है.
– सोनू मालवीय
सफाईकर्मी कभी-कभार बैक लाईन की सफाई करते हैं, लेकिन वे वहां से निकली गंदगी बाहर पटककर चलते जाते हैं. जिसे कई दिनों तक उठाया ही नहीं जाता. इससे पनपने वाले मच्छर, मक्खी खाने-पीने की चीजों पर आकर बैठते हंै ऐसे में बीमारियां फैलती हैं.
– शोभा चौकसे
आज भी क्षेत्र में खुली नालियां मौजूद हैं, सफाई बराबर नहीं होती. हर जगह कचरा पड़ा रहता है. क्षेत्र के लोग कई तरह की बीमारियों की चपेट में है, इस पर कोई ध्यान नहीं दे रहा. कुल मिलाकर क्षेत्र में कभी भी विस्फोटक स्थिति बन सकती है.
– कृष्णा यादव
