समृद्ध किसान से समृद्ध मध्य प्रदेश की राह

मध्य प्रदेश, जिसे देश का ‘सोया स्टेट’ और ‘गेहूं का भंडार’ कहा जाता है, आज अपने विकास की दिशा में एक नए और निर्णायक मोड़ पर खड़ा है. 11 जनवरी 2026 को भोपाल के जंबूरी मैदान से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव‘ द्वारा ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ का शुभारंभ केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का दूरदर्शी संकल्प है. यह पहल इस सच्चाई को स्वीकार करती है कि मध्य प्रदेश की आर्थिक मजबूती का आधार आज भी किसान और खेती ही हैं.मध्य प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका किसी भी अन्य राज्य की तुलना में कहीं अधिक गहरी और व्यापक है. बजट 2025-26 और ताजा अनुमानों के अनुसार राज्य की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों का योगदान लगभग 44 से 47 प्रतिशत के बीच है, जो राष्ट्रीय औसत से ढाई गुना से भी अधिक है. यही नहीं, प्रदेश की करीब 70 प्रतिशत आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से खेती और पशुपालन पर निर्भर है. सोयाबीन, दलहन और चना उत्पादन में देश में पहला स्थान और गेहूं उत्पादन में अग्रणी राज्यों में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि मध्य प्रदेश वास्तव में भारत की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ है.

इसी पृष्ठभूमि में ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ को देखा जाना चाहिए. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का स्पष्ट दृष्टिकोण है कि किसान को केवल अनुदान या राहत का पात्र नहीं, बल्कि आर्थिक विकास का साझेदार बनाया जाए. इस वर्ष की थीम ‘समृद्ध किसान-समृद्ध प्रदेश’ इसी सोच को दर्शाती है. सरकार का रोड मैप तकनीक, विविधीकरण, अंतरराष्ट्रीय अनुभव और मूल्य संवर्धन जैसे आधुनिक स्तंभों पर टिका है. ड्रोन तकनीक, एग्री-टेक स्टार्टअप और हाइड्रोपोनिक्स को बढ़ावा देकर खेती को युवा पीढ़ी के लिए आकर्षक और लाभकारी व्यवसाय बनाने का प्रयास सराहनीय है.

खेती के विविधीकरण पर दिया गया जोर भी समय की मांग है. पारंपरिक फसलों के साथ उद्यानिकी, डेयरी और मत्स्य पालन को प्रोत्साहन देकर किसानों की आय को मौसम और बाजार के जोखिम से बचाने की रणनीति स्पष्ट दिखाई देती है. साथ ही, प्रगतिशील किसानों को इजराइल और ब्राजील जैसे देशों में आधुनिक सिंचाई और बीज प्रबंधन का प्रशिक्षण देने की घोषणा यह दर्शाती है कि राज्य सरकार वैश्विक श्रेष्ठ अनुभवों को स्थानीय खेतों तक पहुंचाना चाहती है.

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में चलाई जा रही किसान हितैषी योजनाएं इस विजन को जमीन पर उतारने का काम कर रही हैं. मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना, कृषि उन्नति योजना के तहत बोनस, रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन जैसी योजनाएं किसानों की आय में सीधा इजाफा कर रही हैं. सिंचाई क्षमता को 58 लाख हेक्टेयर से अधिक तक ले जाने का लक्ष्य और प्राकृतिक खेती मिशन, दीर्घकाल में खेती को टिकाऊ और पर्यावरण-संतुलित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं.

कुल मिलाकर, ‘कृषक कल्याण वर्ष 2026’ मध्य प्रदेश के विकास मॉडल का केंद्र बिंदु किसान को बनाता है. मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसान हितैषी विजन यह मानता है कि जब किसान की आमदनी बढ़ेगी, तभी गांव का बाजार मजबूत होगा और राज्य की जीडीपी को नई गति मिलेगी. यदि घोषित नीतियों का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो यह वर्ष न केवल किसानों के लिए, बल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए आर्थिक परिवर्तन का वर्ष साबित हो सकता है.

 

 

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