नई दिल्ली, देश के कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अलनीनो के संभावित खतरों और मानसून में 24 प्रतिशत की कमी को देखते हुए एक व्यापक रणनीति की घोषणा की है। पिछले वर्ष की तुलना में बोनी में 91 लाख हेक्टेयर की गिरावट ने चिंताएं बढ़ा दी हैं। इसे ध्यान में रखते हुए, सरकार ने 14 राज्यों के 311 संवेदनशील जिलों की पहचान की है। किसानों की सुरक्षा और फसलों को बचाने के लिए इन जिलों में एक ठोस ‘कंटजेंसी प्लान’ लागू किया गया है, जिसके तहत उन्हें कम पानी में तैयार होने वाले उन्नत बीज और तकनीकी सहायता प्रदान की जा रही है।
‘विकसित भारत’ योजना से ग्रामीण सशक्तिकरण
ग्रामीण विकास को गति देने के लिए 1 जुलाई से पूरे देश में ‘विकसित भारत’ योजना प्रभावी कर दी गई है। इसके लिए 1,51,282 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट आवंटित किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार का हिस्सा 95,600 करोड़ रुपये है। इस योजना के अंतर्गत रोजगार गारंटी के तहत मिलने वाले कार्य दिवसों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। यह पहल न केवल मजदूरों के लिए आजीविका सुनिश्चित करेगी, बल्कि गांवों में तालाबों, चेक डैम और जल संरचनाओं के निर्माण के माध्यम से स्थायी संपत्ति का सृजन भी करेगी।
समन्वय और स्वावलंबी गांव का लक्ष्य
कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए हर राज्य में एक नोडल अधिकारी तैनात किया गया है। सरकार का मुख्य लक्ष्य गांवों को गरीबी मुक्त और स्वावलंबी बनाना है। खेती के अलावा पशुपालन और चारे की व्यवस्था जैसे वैकल्पिक रोजगारों पर भी जोर दिया जा रहा है। ‘खेत बचाओ अभियान’ के जरिए किसानों को उनकी मिट्टी और बदलती जलवायु के अनुकूल खेती करने के लिए शिक्षित किया जा रहा है, ताकि ‘विकसित भारत’ के संकल्प को जमीनी स्तर पर साकार किया जा सके।

