नई दिल्ली, दिल्ली में आयोजित ‘कॉन्क्लेव 2026’ में अभिनेत्री भूमि पेडनेकर ने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को लेकर अपने विचार साझा किए। उन्होंने एक कलाकार के रूप में अपनी जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि कला एक सशक्त माध्यम है, जिसके जरिए करोड़ों लोगों को प्रभावित किया जा सकता है। अभिनेत्री ने स्पष्ट किया कि जब भारत अपनी स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरे करेगा, तो उस विकसित राष्ट्र की नींव में महिलाओं का योगदान सबसे महत्वपूर्ण होगा। उन्होंने स्वयं को इस ऐतिहासिक विकास यात्रा का सक्रिय हिस्सा बनने के लिए प्रतिबद्ध बताया।
आधी आबादी के बिना प्रगति संभव नहीं
भूमि पेडनेकर ने आर्थिक प्रगति पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत के पास अगले दो दशकों में एक मल्टी-ट्रिलियन डॉलर अर्थव्यवस्था बनने का सुनहरा अवसर है, लेकिन यह लक्ष्य तब तक अधूरा है जब तक महिलाओं को सशक्त नहीं किया जाता। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की भागीदारी केवल सम्मान का विषय नहीं, बल्कि एक आर्थिक आवश्यकता है। उनके अनुसार, वर्कफोर्स में महिलाओं की उपस्थिति तब तक नहीं बढ़ सकती जब तक उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और स्वच्छता के बुनियादी अधिकार नहीं मिलते।
शिक्षा और स्वास्थ्य से बदलाव की शुरुआत
अभिनेत्री ने शिक्षा और स्वास्थ्य को देश की प्रगति का आधार बताते हुए कहा कि सशक्तिकरण की शुरुआत हमारे घरों और रसोई से होनी चाहिए। यदि एक बच्ची को अच्छी शिक्षा और पोषण मिलता है, तभी वह भविष्य में एक उत्पादक नागरिक बनकर देश के निर्माण में योगदान दे सकेगी। भूमि ने स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था के अंतर्संबंधों को समझाते हुए कहा कि आने वाली पीढ़ी को सेहतमंद बनाने के लिए जमीनी स्तर पर सामाजिक सोच में बदलाव लाना अनिवार्य है, ताकि आधी आबादी विकास की मुख्यधारा में शामिल हो सके।

