एफआईआर दर्ज, चल रही थी विभागीय जांच, अधिकारियों की भूमिका पर सवाल
जबलपुर:नागरिक आपूर्ति निगम में एक बार फिर गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। मुख्यालय द्वारा जिन राइस मिलरों को मिलिंग से रोका गया है, वे पहले से ही एफआईआर और विभागीय जांच के दायरे में थे। इसके बावजूद जिला स्तर पर उन्हें मिलिंग की अनुमति दिए जाने से अधिकारियों की कार्यशैली और नीयत पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि संबंधित राइस मिलरों की जानकारी मुख्यालय को पहले से थी, तो फिर मिलिंग शुरू होने के बाद आदेश क्यों बदले गए। वहीं यदि जानकारी नहीं दी गई, तो क्या जिला कार्यालय ने जानबूझकर तथ्य छुपाए। दोनों ही स्थितियों में जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। पूरे प्रकरण ने नागरिक आपूर्ति निगम के जिला कार्यालय से लेकर मुख्यालय तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
काम शुरू होने के बाद जिले से हुआ भुगतान
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार प्रतिबंधित राइस मिलरों ने मिलिंग का कार्य शुरू कर दिया था और जिला कार्यालय द्वारा उन्हें भुगतान भी किया जा चुका है। अब मुख्यालय के आदेश के बाद न केवल काम रुका है, बल्कि भुगतान की गई राशि भी अधर में लटक गई है।
किस अधिकारी ने किया वेरिफिकेशन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस मामले में संचालित राइस मिल पर दो अलग-अलग अनुबंध कर लिए गए। जबकि अनुबंध से पहले फिजिकल वेरिफिकेशन, जियो टैगिंग, दूरी सत्यापन, मीटर लोड और बिजली कनेक्शन की जांच अनिवार्य होती है। ऐसे में सवाल उठता है कि दूसरे अनुबंध के समय फिजिकल वेरिफिकेशन किस अधिकारी ने और किन आधारों पर किया
