तेंदुआ का शिकार करने वाले अब भी घूम रहे आजाद
जबलपुर: समाधि रोड से लगे जबलपुर-मंडला की बॉर्डर में मादा तेंदुए के शिकार मामले में वन विभाग और टाइगर स्ट्राईक फोर्स के हाथ अभी भी खाली हैं। जबकि शिकार के मामले में पारधी गैंग के कमरों तक वन विभाग की टीम पहुंच चुकी थी। लेकिन जांच धीरे होने के कारण तेंदुआ व अन्य वन्य प्राणियों का शिकार करने वाले शिकारियों का समूह अब भी आजाद है। जानकारी के अनुसार जांच के दौरान तेंदुआ के शिकार करने के मुख्य आरोपियों में वन्य प्राणियों के शिकार के लिए कुख्यात माने जाने वाले पारधी गिरोह का नाम सामने आया था.
जिन्होंने ग्राम देवरी में बेस कैंप तक बना रखा था। यहां से शिकारी मंडला से लेकर जबलपुर तक के जंगलों में वन्य प्राणियों का शिकार करते थे। और फिर बड़े ही शातिराना अंदाज में तेंदुआ और अन्य अहम वन्य प्राणियाों के विशेष अंगों को काटकर शेष बॉडी को डिस्पोज कर देते थे।गौरतलब है कई माह पहले समाधि रोड से लगे जबलपुर-मंडला की बॉर्डर में झाड़ियों में तेंदुए का शव मिला था, तेंदुए का पीएम हुआ तो उसमें साफ हुआ कि तेंदुए का शिकार करंट लगाकर किया गया है और तेंदुए के पिछले पैर के पंजे व जबड़ा भी गायब था।
देवरी के दो मकानों से जप्त किए गए थे हथियार
जानकारी के अनुसार जांच टीम शिकारी का पता लगाते-लगाते मंडला जिले के बीजाडांडी थाना क्षेत्र स्थित देवरी गांव पहुंची थी जहां स्थित दो मकानों की सर्चिंग की गई। इन मकानों के अंदर वन विभाग की टीम को वन्य प्राणियों के शिकार में उपयोग होने वाले खतरनाक हथियार व औजारों के साथ कई वन्य प्राणियों के अंग मिले थे। जिसके बाद से ये तो साफ हो गया था कि शिकारियों ने उक्त स्थल को अपना सुरक्षित बेस कैंप बना रखा था और आसपास के वन क्षेत्रों में वारदातों को अंजाम दे रहा था।
