नई दिल्ली | 10 जनवरी, 2026: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया विवादों के घेरे में आ गई है। चुनाव आयोग (ECI) ने उन शिकायतों की समीक्षा करने का फैसला किया है, जिनमें आरोप लगाया गया है कि आई-पैक (I-PAC) के कर्मचारियों को अवैध रूप से डेटा-एंट्री ऑपरेटर के तौर पर नियुक्त किया गया था। आरोप है कि इन निजी कर्मियों को सरकारी अनुबंध कर्मचारी बताकर सिस्टम में शामिल किया गया। यह कदम तब उठाया गया है जब हाल ही में ईडी ने आई-पैक के ठिकानों पर छापेमारी की थी। अब आयोग नियुक्त किए गए सभी अनुबंधित कर्मचारियों के बैकग्राउंड और पुलिस वेरिफिकेशन की दोबारा जांच कराएगा।
चुनाव आयोग ने इन शिकायतों को बेहद गंभीरता से लिया है क्योंकि डेटा-एंट्री ऑपरेटरों का काम अंतिम मतदाता सूची तैयार करने में निर्णायक होता है। ये ऑपरेटर बूथ-लेवल अधिकारियों (BLO) द्वारा जुटाए गए डेटा को सिस्टम में मैन्युअल रूप से दर्ज करते हैं। सूत्रों के अनुसार, पुनरीक्षण के पहले चरण में कई गलत प्रविष्टियाँ सामने आई थीं, जिससे मतदाताओं के एक विशेष वर्ग के नाम कटने या प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया था। आयोग को अंदेशा है कि निजी संस्था के लोग डेटा के साथ छेड़छाड़ कर आगामी चुनाव के परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं।
पश्चिम बंगाल में 16 दिसंबर 2025 को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी की गई थी, जबकि अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को प्रकाशित होनी है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि अंतिम सूची जारी होने से पहले सभी ऑपरेटरों की शुद्धता और उनके सरकारी रिकॉर्ड की गहन पड़ताल की जाएगी ताकि चुनाव की निष्पक्षता बनी रहे। फाइनल लिस्ट जारी होने के तुरंत बाद आयोग पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर सकता है। इस जांच से राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया है और विपक्षी दल इसे सत्ताधारी दल की चुनावी साजिश करार दे रहे हैं।

