
जबलपुर। भाजपा के सुरखी विधायक और राज्य सरकार के कैबिनेट मंत्री गोविंद सिंह राजपूत के निर्वाचन को लेकर एक बार फिर संवैधानिक सवाल खड़े हो गए हैं। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने स्पष्ट किया कि किसी भी प्रतिनिधित्व को अनिश्चितकाल तक लंबित नहीं रखा जा सकता। यदि इलेक्शन कमीशन इसे सुनवाई योग्य नहीं मानता था तो उसे निरस्त किया जाना चाहिए था। कोर्ट ने कांग्रेस के नीरज शर्मा की इस याचिका को वर्ष 2025 में दायर पूर्व याचिका के साथ क्लब कर दिया है और स्पष्ट किया है कि फिलहाल कोई अंतिम आदेश नहीं दिया जा रहा। मामले की शीघ्र संभावित हैए जहां इलेक्शन कमीशन को अपनी अब तक की कार्रवाई का विवरण पेश करना पड़ सकता है।
नई याचिका में आरोप लगाया गया है कि चुनाव के समय गोविंद सिंह राजपूत ने अपनी संपत्ति का सही विवरण नहीं दिया। इस संबंध में इलेक्शन कमीशन को दी गई शिकायत पर वर्षों से कोई कार्रवाई नहीं की गई। याचिका में इलेक्शन कमीशन पर निष्क्रियता का भी आरोप लगाया गया है। हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान इलेक्शन कमीशन और गोविंद सिंह राजपूत की ओर से याचिका की मेंटेनेबिलिटी पर सवाल उठाए गए। अधिवक्ताओं ने दलील दी कि शिकायत पहले से इलेक्शन कमीशन में लंबित है। सरकार को पक्षकार नहीं बनाया गया है और इसे जनहित याचिका के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, जबकि यह व्यक्ति विशेष से प्रेरित है। कोर्ट ने इन दलीलों के बावजूद याचिका को निरस्त करने से इनकार कर दिया और मीडिया रिपोर्टिंग पर रोक लगाने के मौखिक आग्रह को भी अस्वीकार कर दिया।
