
सीहोर। लगातार ठंड का असर बढ़ता जा रहा है. दो दिन तक कोल्ड डे रहने के बाद सोमवार को सीवियर कोल्ड डे रहा। ऐसे में सर्द हवा के असर से पूरा शहर कंपकंपाता नजर आया.
स्थिति यह थी कि दिन के तापमान में सीधे 3 डिग्री और रात के तापमान में 4 डिग्री की गिरावट रिकार्ड हुई. ऐसे में अधिकतम तापमान 18.6 और न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. दोनों ही तापमान सामान्य से 5 डिग्री कम थे. वहीं प्रशासन की अनदेखी के कारण सुबह के समय कड़ाके की ठंड में ही बच्चों को स्कूल जाना पड़ा. जबकि भोपाल, रायसेन, विदिशा, शाजापुर, राजगढ़ सहित आसपास के सभी जिलों में प्राइमरी और मिडिल स्कूल की छुट्टियां घोषित कर दी गई हैं. इसको लेकर लोगों ने दिनभर सोशल मीडिया पर ट्रोल किया. आखिरकार दोपहर में कलेक्टर बालागुरु के. ने एक आदेश जारी किया जिसमें सुबह की पाली 9.30 बजे से लगाने के निर्देश दिए हैं. जबकि मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में ठंड का असर और ज्यादा बढऩे की संभावना जताई हैं. ऐसे में स्कूल जाने वाले छोटे ठंड की चपेट में आकर बीमार पड़ सकते हैं. बता दें कि सोमवार सीजन का सबसे ज्यादा ठंडा दिन रहा. अधिकतम तापमान मात्र 18.6 डिग्री रहा. इससे एक दिन पहले रविवार को अधिकतम तापमान 21.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. कड़ाके की ठंड का असर आम जनजीवन पर दिखाई दे रहा है. जिला अस्पताल के मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. आरके वर्मा के अनुसार आने वाले दिनों में यदि पारा इसी तरह यथावत अथवा और नीचे गिरता है, तो शीतलहर और तेज ठंड के दौरान हार्ट और बीपी के मरीज ऐहतियात बरतें। पैर, हाथ और छाती को सीधी हवा लगने से बचाएं। संभव हो तो सत को आग से ताप कर शरीर को गर्म करके सोएं। लेकिन सोने से पहले आग को बुझा दें अन्यथा दम घुटने जैसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है. ऐसे सीजन में लकवा और फेशियल पैरालिसिस की आशंका सबसे ज्यादा रहती है.
स्कूल खुले, लेकिन बच्चों की संख्या रही कम
जिले में तेज ठंड में प्राइमरी और मिडिल स्कूल के बच्चों की छुट्टी घोषित नहीं की गई. सुबह की पाली में स्कूल 9.30 बजे से लगाने के निर्देश दिए गए हैं. लेकिन स्कूलों की छुट्टी नहीं की गई. ठंड के कारण सोमवार को स्कूलों में बहुत कम संख्या में बच्चे पहुंचे. शासकीय टैगोर स्कूल में सिर्फ 2 बच्चे ही पहुंचे. अन्य कक्षाएं खाली पड़ी रहीं. शासकीय तिलक स्कूल की कक्षा 8वीं में मात्र 1 छात्रा ही उपस्थित रही। वहीं 4थी में 4 बच्चे आए। कक्षा एक और दो में कुल मिलाकर 3 विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे. इसी तरह सिपाहीपुरा स्कूल में कक्षाएं खाली पड़ी रहीं.
