
सीहोर। सोमवार की शाम जिला अस्पताल के सामने एक दंपत्ति अपने बच्चों के साथ बीच सड़क पर बैठ गए. उनका कहना था कि अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही के कारण उसकी नवजात शिशु बालिका की मौत हो गई है. इसके अलावा वह अब उसे बच्ची का शव देने से भी मना कर रहे हैं. लगभग 50 मिनट तक अस्पताल के गेट पर हंगामा होता रहा. घटनाक्रम ने एक बार फिर अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर सवालिया निशान लगा दिया है.
सोमवार की शाम लगभग 5 बजे जिला अस्पताल के सामने एक पति- पत्नी बच्चों के साथ सड़क पर आकर बैठ गए. उन्हें सड़क पर बैठा देखकर लोगों ने उनसे पूछताछ की तो उनका कहना था कि अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर वह रोष जताने सड़क पर बैठे हैं.
जिले की भैरूंदा तहसील के निवासी संतोष जाट ने बताया कि उसकी गर्भवती पत्नी को भैरूंदा के अस्पताल से 29 दिसंबर को सीहोर रेफर किया गया था. गत दो जनवरी की देर रात उसकी पत्नी की डिलेवरी हुई. संतोष का कहना है कि डिलेवरी के दौरान मेटरनिटी वार्ड में कोई जिम्मेदार लेडी डॉक्टर मौजूद नहीं होने के कारण उसकी पत्नी को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
संतोष जाट का कहना है कि उसकी पत्नी ने नवजात बालिका को जन्म दिया. उसके बाद बच्ची को एसएनसीयू में भर्ती कर दिया गया और उसे व उसकी पत्नी को बच्ची को देखने तक नहीं दिया जाता रहा. आज उसे बताया गया कि उसकी बच्ची की मौत हो गई है. यह सुनकर उनके दुख का कोई ठिकाना नहीं रहा, लेकिन उनका दुख उस समय और बढ़ गया जब डॉक्टरों ने उसे नवजात का शव देने से इंकार कर दिया. नतीजतन उसे अपनी नवप्रसूता पत्नी ममता जाट के साथ सड़क पर बैठकर धरने पर बैठना पड़ा.
व्यस्ततम सड़क पर पति- पत्नी के धरने पर बैठने से यातायात बाधित हो रहा था. इसके अलावा वहां तमाशबीनों की भीड़ भी जमा हो गई थी. मामले की जानकारी मिलने के बाद थाना प्रभारी रविन्द्र यादव मौके पर पहुंचे और संतोष जाट से चर्चा की. उसने पुलिस के समक्ष भी अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही के कारण उसकी नवजात बालिका की मौत होने का आरोप लगाया. लगभग 50 मिनट तक अस्पताल के गेट पर गहमा गहमी का माहौल बना रहा. थाना प्रभारी द्वारा दी गई समझाईश के बाद वह सड़क से उठा.
हंगामा कर रहे युवक को पुलिस ने पकड़ा
बताया जाता है कि धरना दे रहे पति- पत्नी के पास एक अंजान युवक पहुंचा और अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए अनर्गल गाली- गलौच करने लगा. इतना ही नहीं वह संतोष जाट से बोला मेरे साथ अस्पताल के अंदर चलो अपन डॉक्टर को सही करते हैं. किसी तरह उसे लोगों ने वहां से चलता किया तो वह अस्पताल के अंदर जा घुसा और हंगामा करने लगा. इस दौरान अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों के साथ भी उसकी बहसबाजी हुई. मौके पर पहुंची पुलिस ने उसे पकड़ा और गाड़ी में बैठा लिया, हालांकि आगे जाकर उसने मान मनोव्वल की तो पुलिसकर्मियों ने उसे हिदायत देकर वहां से चलता कर दिया.
शव वाहन में बैठने से किया इंकार
थाना प्रभारी रविन्द्र यादव और सिविल सर्जन डॉ. यूके श्रीवास्तव द्वारा नवजात का शव उसके गांव तक ले जाने के लिए अस्पताल का शव वाहन मुहैया कराया गया, लेकिन अस्पताल की अव्यवस्थाओं से संतोष इतना आक्रोशित था कि उसने शव वाहन की सुविधा लेने से साफ इंकार कर दिया और अपनी बच्ची का शव लेकर वहां से चला गया.
नवजात का वजन काफी कम था
बच्चा प्रीमैच्योर था और उसका वजन महज 960 ग्राम था. इस कारण उसे वेंटीलेटर पर रखा गया था. परिजनों को बता दिया गया था कि उसके सर्वाइब करने के चांस काफी कम हैं. फिर भी हमारे चिकित्सकों ने कोई लापरवाही नहीं की. उसके द्वारा लगाए गए आरोप बेबुनियाद हैं. वह पहले दिन से ही सबसे विवाद कर रहा था. वह शव लेने से पूर्व आवश्यक कार्रवाई नहीं कर रहा था. उसे अब शव दे दिया गया है.
डॉ. यूके श्रीवास्तव ,
सिविल सर्जन
