
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट ने एक मामले में कहा है कि निविदा प्रकिया में भाग लेने के बाद उसकी शर्तो को चुनौती नहीं दी जा सकती। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने उक्त मत के साथ दुकानदार की याचिका निरस्त कर दी।
यह मामला टीकमगढ़ के पृथ्वीपुर निवासी महेन्द्र अग्रवाल की ओर से दायर किया गया था। जिसमें नगर पंचायत पृथ्वीपुर के 16 अक्टूबर 2012 के प्रस्ताव को चुनौती दी गई थी। आवेदक का कहना था कि नगर पंचायत पृथ्वीपुर द्वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की दुकान का किराया तीन हजार प्रतिमाह किया, जबकि तहसीलदार ने पंद्रह सौ रुपये प्रतिमाह निर्धारित किया था। आवेदक का कहना था कि नगर पंचायत पृथ्वीपुर के द्वारा 19 दुकानों की नीलामी की गई। जिसमें की उसके द्वारा दुकान क्रमांक-19 को उसके पक्ष में उच्चतम बोली बोली जाने कारण उसकी निविदा स्वीकृत की गई थी। इतना ही नहीं नगर पंचायत विभिन्न दुकानों का मासिक किराया भिन्न-भिन्न रखा जो कि उसके अनुसार कम था और उसे अधिक मासिक दर पर दुकान प्रदान की गई। मामले में नगर पंचायत पृथ्वीपुर की ओर से अधिवक्ता मनोज कुशवाहा व कौशलेन्द्र सिंह ने पक्ष रखते हुए उक्त दुकान सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के सामने थी, जिस कारण उस दुकान का मासिक किराया ज्यादा था। उस समय पर जो गाइडलाइन थी, उस दौरान दुकान का मासिक किराया 3500 रुपए था, जबकि नगर परिषद द्वारा तीन हजार रुपये ही तय किया गया। नगर पंचायत की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता ने निविदा की समस्त शर्तों को पढऩे के पश्चात ही निविदा प्रक्रिया में भाग लिया और जब निविदा उसके पक्ष में उच्चतम बोली के आधार पर उसे दुकान क्रमांक-19 निविदा में स्वीकृत की गई, अत: अब वह दुकान के मासिक किराया को चुनौती नहीं दे सकता। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि निविदा की समस्त शर्तों को जानते हुए ही आवेदक ने निविदा प्रक्रिया में भाग लिया एवं उच्चतर बोली होने के कारण उसके पक्ष में दुकान का स्थानांतरण उसके पक्ष में किया गया। जिसके बाद ही उसके द्वारा अनुबंध पत्र भी निष्पादित किया गया, जिसमें उसने हस्ताक्षर किए अत: संपूर्ण प्रक्रिया के बाद वह निविदा प्रक्रिया को चुनौती नहीं दे सकता एवं याचिका निरस्त कर दी।
