हमें उम्मीद है कि हम भारत पर दबाव बना पाएंगे : कॉनराड

अहमदाबाद, 21 फरवरी (वार्ता) शुक्री कॉनराड के लिए टी20 विश्व कप का असली रोमांच अब शुरू हुआ है। दक्षिण अफ़्रीका के हेड कोच के तौर पर अपने पहले ही सीमित ओवरों के बड़े टूर्नामेंट में कॉनराड के सामने सबसे कड़ी चुनौती है। सुपर 8 के पहले ही मुक़ाबले में उनका सामना टीम इंडिया से है। इस मैच को वह टूर्नामेंट का अब तक का सबसे बड़ा मैच मान रहे हैं। उनके मुताबिक़ पहला लक्ष्य यहां तक पहुंचना था और अब यहां से खेल का आनंद लेना है। कॉनराड ने कहा, “ग्रुप स्टेज का शुरुआती दौर मेरे लिए घबराहट भरा था, लेकिन अब सिर्फ़ उत्साह है। टूर्नामेंट क्रिकेट मोटे तौर पर तीन हिस्सों में बंटा होता है। सबसे बड़ी चुनौती ग्रुप स्टेज की बाधा पार करने की थी, जो हमने कर लिया। अब हमारे सामने पहले भारत है और फिर वेस्टइंडीज है। इनके पास दुनिया के सबसे धाकड़ और मनोरंजक खिलाड़ी हैं। यह बात मुझे काफ़ी उत्साहित करती है।” सुपर 8 के अपने सफर का अंत दक्षिण अफ़्रीका अपने पड़ोसी ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ करेगा। मुमकिन है कि तब तक सेमीफ़ाइनल की तस्वीर साफ़ हो जाए, इसलिए अहमदाबाद में होने वाले अगले पांच दिन बेहद अहम रहने वाले हैं। रविवार को यहां खचाखच भरा हुआ स्टेडियम देखने को मिल सकता है। न्यूज़ीलैंड के ख़िलाफ इसी मैदान पर क़रीब 55,000 दर्शक पहुंचे थे, लेकिन इस बार यह तादाद दोगुनी होने की उम्मीद है। मैच काली मिट्टी की पिच पर होना है, जो धीमी रह सकती है और यहां स्पिनरों का रोल बड़ा हो जाएगा।

हालात को देखते हुए पलड़ा भले ही भारत का भारी लगे, लेकिन कॉनराड ने बड़ी चतुराई से दबाव का पासा मेजबान टीम की तरफ़ फेंक दिया। उन्होंने कहा, “दबाव एक बड़ी चीज़ है और यह दोनों टीमों पर बराबर है। हम अक्सर बड़ी टीम के ख़िलाफ खेलने के दबाव की बात करते हैं, लेकिन हम उस दबाव को नहीं देख पाते जिससे वे ख़ुद गुजर रहे होते हैं। मैं यह नहीं कह रहा कि पिछले तीन मैचों में लगातार शून्य पर आउट होने वाला कोई खिलाड़ी अपनी जगह को लेकर दबाव में होगा।” कॉनराड का इशारा साफ़ तौर पर अभिषेक शर्मा की तरफ था, जो अब तक खाता भी नहीं खोल पाए हैं और बीमारी की वजह से एक मैच से बाहर भी रहे। वे तीन मैचों में दो बार ऑफ़ स्पिनरों का शिकार हुए हैं। चूंकि दक्षिण अफ़्रीका के मुख्य आक्रमण में सिर्फ़ दो बाएं हाथ के स्पिनर हैं, इसीलिए शुक्रवार को नेट्स पर ऐडन मारक्रम और ट्रिस्टन स्टब्स ऑफ़ स्पिन का जमकर अभ्यास करते नज़र आए। ऐसा हो सकता है कि वे किसी बड़ी भूमिका के लिए तैयार हो रहे हों, या फिर यह भारतीय बैटिंग ऑर्डर के ख़िलाफ़ कोई मनोवैज्ञानिक चाल हो, क्योंकि भारत के टॉप-6 में कम से कम चार बाएं हाथ के बल्लेबाज़ हैं। हालांकि, कॉनराड मैच-अप्स को लेकर बहुत ज़्यादा उत्साहित नहीं दिखे। उन्होंने कहा, “मैच-अप्स को कभी-कभी जरूरत से ज़्यादा तवज्जो दे दी जाती है। मैं इसका बहुत बड़ा समर्थक नहीं हूं। कई बार पिच इतनी शानदार होती है कि मैच-अप्स का असर ही खत्म हो जाता है। अगर विकेट से मदद मिले और गेंद थोड़ा घूमे, तब बाएं हाथ के बल्लेबाज के सामने ऑफ स्पिनर या गेंदबाज़ी कोण का लाभ ले सकते हैं। लेकिन अच्छी पिचों पर इसे अक्सर बढ़ा-चढ़ाकर ही देखा जाता है।” ग्रुप स्टेज के 40 मैचों में सिर्फ़ सात बार पहली पारी का स्कोर 200 के पार गया है। इसके बावजूद कॉनराड को लगता है कि पिचें पिछले साल के भारत दौरे के मुक़ाबले “थोड़ी बेहतर” हैं। तो फिर वे बड़े स्कोर, ख़ासकर टूर्नामेंट से पहले चर्चा में रहने वाले 300 रन अब तक क्यों नहीं बने? इसका जवाब फिर उसी एक शब्द में छिपा है – दबाव।

कॉनराड के मुताबिक़, “इसका कारण विश्व कप का दबाव है। टूर्नामेंट से पहले लोग 300 से ज़्यादा रनों की बातें कर रहे थे, लेकिन विश्व कप में दांव पर बहुत कुछ लगा होता है। द्विपक्षीय सीरीज़ में खिलाड़ी बिना किसी फ़िक्र के खुलकर खेलते हैं, लेकिन विश्व कप का दबाव बिल्कुल अलग होता है।” दक्षिण अफ़्रीका इस बात से भी वाक़िफ़ है कि टीम इंडिया पर इतिहास दोहराने और हर हाल में ट्रॉफ़ी जीतने की उम्मीदों का कितना भारी बोझ है। कॉनराड ने कहा, “भारत जैसी टीम पर हमेशा सबकी नजरें टिकी रहती हैं। उन पर सेमीफ़ाइनल और फिर फ़ाइनल तक पहुंचने का ज़बरदस्त दबाव होगा। हमें उम्मीद है कि हम उस दबाव का फ़ायदा उठाकर उन्हें मुश्किल में डाल सकेंगे।” साथ ही कॉनराड इस बात से भी वाक़िफ़ हैं कि भारत पलटवार करने में कितना माहिर है। जसप्रीत बुमराह और वरुण चक्रवर्ती की अगुवाई वाला गेंदबाज़ी अटैक और मजबूत बैटिंग लाइन-अप अब तक दक्षिण अफ़्रीका की सबसे कठिन परीक्षा साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, “उन्हें सिक्सर उड़ाना पसंद है। वे पहली गेंद से ही सामने वाली टीम पर दबाव बनाने लग जाते हैं। अगर हम शुरुआत में कुछ विकेट निकाल पाए और बल्लेबाज़ी के दौरान उनके शुरुआती हमले को झेल गए, तो यह हमें सही नतीजे की ओर ले जाएगा।” टूर्नामेंट में अब तक इशान किशन संयुक्त रूप से सबसे ज़्यादा 11 सिक्सर लगा चुके हैं। रियान रिकेल्टन आठ सिक्सर के साथ आठवें पायदान पर हैं। वहीं हार्दिक पांड्या के नाम सात सिक्सर हैं। दक्षिण अफ़्रीका इन बड़े शॉट्स की चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसका अनुभव उन्हें पिछले साल के भारत दौरे पर भी हुआ था। टी20 सीरीज़ 3-1 से हारने के बावजूद कॉनराड ने उसे एक तैयारी के तौर पर देखा था और अब वे दिखाना चाहते हैं कि उनकी टीम ने उस हार से क्या सबक लिया है। उन्होंने कहा, “उस दौरे ने हमें साफ़ तौर पर समझा दिया था कि हमारा सामना किससे होने वाला है। रविवार को स्टेडियम खचाखच भरा होगा और हर तरफ़ सिर्फ़ नीली जर्सी ही दिखेगी। लेकिन आगे बढ़ने के लिए हमें जो कुछ मैच जीतने हैं, यह उनमें से सिर्फ़ एक है। हमारी तैयारी जितनी बेहतर हो सकती थी, उतनी हम कर चुके हैं। ”

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