
इंदौर. साइबर अपराध के मामले में इंदौर प्रदेश में सबसे आगे निकल गया है. बीते एक साल में शहर में 8 हजार से अधिक साइबर ठगी की शिकायतें सामने आईं, जिनमें 101 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी दर्ज की गई. हालांकि पुलिस और साइबर सेल की कार्रवाई के बावजूद ठगी की रकम में से अब तक 17 करोड़ रुपए से ज्यादा ही वसूल हो पाए हैं.
प्रदेशभर में साइबर फ्रॉड का आंकड़ा और भी चौंकाने वाला है. उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मध्यप्रदेश में कुल 581 करोड़ रुपए का साइबर फ्रॉड दर्ज हुआ, लेकिन इसमें से सिर्फ 137 करोड़ रुपए की ही रिकवरी हो सकी. यानी करीब 444 करोड़ रुपए की राशि अब भी फ्रॉड करने वालों के पास या तकनीकी अड़चनों के चलते ट्रेस नहीं हो पाई है. पूरे प्रदेश में साइबर अपराध से जुड़ी करीब 56 हजार शिकायतें दर्ज की गई हैं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में ठगी के मामले अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े होते हैं, जिससे रकम की वसूली और आरोपियों तक पहुंचने में तकनीकी दिक्कतें आती हैं. कई मामलों में फ्रॉड करने वाले आरोपियों की पहचान तक नहीं हो पाती. इंदौर में साइबर सेल और क्राइम ब्रांच लगातार इस चुनौती से निपटने में जुटी है. साइबर एक्सपर्ट और क्राइम ब्रांच के एडीसीपी राजेश दंडोतिया के नेतृत्व में लोगों को ठगी से बचाने के लिए जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं. सोशल मीडिया के जरिए भी साइबर फ्रॉड के नए तरीकों और उनसे बचाव की जानकारी लगातार साझा की जा रही है. पुलिस का दावा है कि वर्ष 2025 में साइबर अपराध के मामलों में प्रभावी कार्रवाई की गई है. होल्ड कराई गई रकम 2024 की तुलना में तीन गुना से अधिक रही है. इसी का नतीजा है कि जहां एक साल पहले प्रदेश साइबर फ्रॉड रिकवरी में 22 वें स्थान पर था, वहीं अब यह छठवें स्थान पर पहुंच गया है. इसके बावजूद बढ़ते मामलों ने पुलिस और आम लोगों दोनों के लिए चिंता बढ़ा दी है.
