नई दिल्ली, 01 जनवरी, 2026: डोनाल्ड ट्रंप के अमेरिकी राष्ट्रपति बनते ही 39 देशों पर लगाए गए सख्त यात्रा प्रतिबंधों के खिलाफ अब वैश्विक बगावत शुरू हो गई है। दो प्रमुख अफ्रीकी देशों, बुर्किना फासो और माली ने कड़ा रुख अपनाते हुए अमेरिकी नागरिकों के अपने देश में प्रवेश पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी है। बुर्किना फासो के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे अमेरिकी नागरिकों के लिए वही कठोर नियम लागू करेंगे, जो ट्रंप प्रशासन ने उनके नागरिकों के लिए तय किए हैं। यह कूटनीतिक जवाबी कार्रवाई ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति के लिए बड़ी चुनौती मानी जा रही है।
ट्रंप प्रशासन ने सुरक्षा कारणों और आतंकवाद का हवाला देते हुए जिन 39 देशों पर प्रतिबंध लगाए हैं, उनमें से 25 अफ्रीकी राष्ट्र शामिल हैं। इन देशों में नाइजर, दक्षिण सूडान और सिएरा लियोन जैसे देश भी हैं, जिनमें से कुछ ने आगामी फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालीफाई किया है। माली के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि अमेरिका ने बिना किसी मशविरे के यह एकतरफा निर्णय लिया है, जिसके जवाब में उन्हें भी अपनी सीमाओं को अमेरिकी नागरिकों के लिए बंद करने का कठिन निर्णय लेना पड़ा है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क है कि इन देशों में कमजोर वीजा प्रक्रियाओं और आपराधिक गतिविधियों के कारण अमेरिका की आंतरिक सुरक्षा को खतरा है। हालांकि, सेनेगल और आइवरी कोस्ट जैसे देशों पर आंशिक प्रतिबंध लगाकर अमेरिका ने दबाव बनाने की कोशिश की है, लेकिन माली और बुर्किना फासो की इस सीधी टक्कर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर तनाव बढ़ा दिया है। अभी तक वाशिंगटन की ओर से इस जवाबी प्रतिबंध पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इससे अमेरिका और अफ्रीकी संघ के संबंधों में बड़ी दरार आ सकती है।

