इंदौर: मध्यप्रदेश कांग्रेस का लगभग दो माह से चल रहा संगठन सृजन अभियान अब पूरा हो चुका है. अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने मध्यप्रदेश के नए ज़िला अध्यक्षों की घोषणा कर दी है. इस पूरी प्रक्रिया को एआईसीसी प्रभारी हरीश चौधरी और राहुल गांधी ने पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट को प्राथमिकता दी.यह अलग बात है कि इंदौर में पर्यवेक्षक की रिपोर्ट को नजर अंदाज किया गया। निगम नेता प्रतिपक्ष चिंटू को अध्यक्ष बनाया, लेकिन वे स्वयं इसका मना कर चुके थे.
जिले में आश्चर्य जनक फैसला करते हुए विपिन वानखेड़े को बनाया दिया. मध्यप्रदेश में कांग्रेस जिला अध्यक्षों की सूची मे 70′ नाम युवा कांग्रेस, एनएसयूआई और सेवादल जैस मुख्य संगठन में काम करने का अनुभव वाले युवाओं को तवज्जो दी गई है. प्रदेश के अधिकाश जिलों में औसत उम्र भी लगभग 45-50 वर्ष के बीच रखी गई है. जिला अध्यक्ष के रूप में 5 वर्ष का कार्यकाल पूर्ण कर चुके सभी अध्यक्षों को एक साथ बदल दिया है.
जैसा कि अहमदाबाद में ही तय हो चुका था कि कांग्रेस में युवा ,पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति को तवज्जों मिलेगी. एआईसीसी ने वैसा ही खाका तैयार कर मध्यप्रदेश के धुरंधर नेताओं को एक तरफ कर युवाओं को जिला और शहर अध्यक्ष की कमान सौंपी है. इंदौर चिंटू चौकसे की जिला अध्यक्ष बनाने में जीतू पटवारी सफल रहे. शहर का कांग्रेस कार्यकर्ता चिंटू के पक्ष में था. सूत्रों का यह भी कहना है कि इसके पीछे उनके खास समर्थक शेख अलीम और दीपू यादव की पत्नी विनितिका यादव को नगर निगम की कमान सौंपने की रणनीति है.
वानखेड़े अप्रत्याशित नाम
जिला अध्यक्ष विपिन वानखेड़े तो अप्रत्याशित नाम ही है. बताया जा रहा है कि इसके पीछे भी इंदौर से राधेश्याम पटेल और मनीष पटेल को नई तरफ मोड़ दिया है। पटेल देपालपुर के सशक्त कांग्रेस उम्मीदवार बन सकते है. वहीं विपिन को आगर से इंदौर लाकर सारे ग्रामीण क्षेत्रों के नेताओं के चक्कर में डाल दिया है. पूरी सूची देखने पर ऐसा माना जा सकता है कि राहुल ने जो कहा वह करने की कोशिश की है. पर्यवेक्षक गुरजीत औजला की रिपोर्ट के उलट शहर में चिंटू के नाम के आगे प्रभारी और जीतू का नाम भी लिखा था. यही कारण चिंटू को कमान सौंपने की सिफारिश को अंतिम निर्णय में बदल गया
