जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया गया है कि प्रदेश के शासकीय नर्सिंग कॉलेजों में असिस्टेंट, एसोसिएट प्रोफेसर व अन्य पदों पर महिलाओं को सौ प्रतिशत आरक्षण दे दिया गया है। मामले पर जस्टिस अमित सेठ तथा जस्टिस हिमांशु जोशी की अवकाशकालीन युगलपीठ ने सरकार को अपना जवाब पेश करने के निर्देश दिए। मामले की सुनवाई 5 जनवरी को नियत की गई है। जबलपुर निवासी नौशाद अली की ओर से अधिवक्ता विशाल बघेल ने पक्ष रखा।
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल की ग्रुप-1 सब ग्रुप-2 संयुक्त भर्ती परीक्षा 2025 के विज्ञापन में असिस्टेंट प्रोफेसर तथा एसोसिएट प्रोफेसर सहित ट्यूटर के कुल 286 पदों पर महिला उम्मीदवारों को सौ प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। प्रदेश के सरकारी नर्सिंग कॉलेजों में 40 एसोसिएट प्रोफेसर, 28 असिस्टेंट प्रोफेसर और 218 सिस्टर ट्यूटर के पद भरे जाने हैं।
इनमें पुरुष उम्मीदवारों को पूरी तरह बाहर कर दिया गया है। इसमें भर्ती नियम तथा इंडियन नेशनल काउंसिल के सभी मापदंड का उल्लंघन किया गया है। दलील दी गई कि लोक स्वास्थ्य कल्याण विभाग के द्वारा की जा रही भर्ती में संविधान के अनुच्छेद 14,15 और 16 तथा भर्ती के नियमों की अनदेखी की जा रही है। यह भी कहा गया कि सरकार की ये भर्ती प्रक्रिया में सुप्रीम कोर्ट के इंद्रा साहनी मामले के 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का उल्लंघन भी है।
