नई दिल्ली। 27 दिसंबर, 2025। रक्षा मंत्रालय ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल को बड़ी मजबूती देते हुए लार्सन एंड टुब्रो (L&T) को भारतीय सेना के लिए ‘बीवीएस10 सिंधु’ ऑल-टेरेन वाहन सप्लाई करने का महत्वपूर्ण ठेका दिया है। इस वाहन को अपनी अदम्य क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ कहा जा रहा है, जो बीएई सिस्टम्स के प्लेटफॉर्म पर आधारित है लेकिन इसे भारतीय जरूरतों के अनुसार पूरी तरह स्वदेशी रूप दिया गया है। सेना ने शुरुआत में 18 वाहनों का ऑर्डर दिया है, जिन्हें लद्दाख, सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश जैसे चुनौतीपूर्ण और बर्फीले ऊंचाइयों वाले क्षेत्रों में तैनात किया जाएगा। यह कदम वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भारतीय सेना की परिचालन क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।
एलएंडटी के अधिकारियों के अनुसार, पहला बीवीएस10 सिंधु वाहन 2027 तक तैयार हो जाएगा, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी पुर्जों का उपयोग किया जाएगा। इसमें लगे इलेक्ट्रॉनिक्स, संचार प्रणालियां और आर्मर पूरी तरह भारत में निर्मित होंगे। सेना की विशेष मांग पर इसमें इंजन के पावर को बढ़ाया गया है और भीषण ठंड से बचने के लिए खास हीटिंग सिस्टम व बैटल मैनेजमेंट सिस्टम जोड़ा गया है। गुजरात के हजीरा स्थित आर्मर्ड सिस्टम्स कॉम्प्लेक्स में इन वाहनों का निर्माण होगा। यह वही फैक्ट्री है जहाँ पहले से ही के-9 वज्र तोप और जोरावर लाइट टैंक जैसे घातक हथियारों का निर्माण किया जा रहा है।
भारतीय सेना ने इस ‘बाहुबली’ वाहन का चयन पांच साल तक चले कड़े परीक्षणों के बाद किया है। इन ट्रायल्स के दौरान बीवीएस10 सिंधु ने रूस और सिंगापुर के शक्तिशाली प्रतिस्पर्धी प्लेटफॉर्म्स को बर्फ, ग्लेशियर और ऊबड़-खाबड़ पथरीले इलाकों में प्रदर्शन के आधार पर पीछे छोड़ दिया। पहले बैच के 18 वाहनों की डिलीवरी 2028 के मध्य तक पूरी होने की उम्मीद है, जिसके बाद सर्दियों में इनके वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर 100 से ज्यादा अतिरिक्त वाहनों का बड़ा ऑर्डर दिया जा सकता है। इसके आने से अब दुर्गम हिमालयी सीमाओं पर चीन की किसी भी हिमाकत का जवाब देना और भी आसान हो जाएगा।

