सतना : दांपत्य जीवन में 2 बेटी और 1 बेटा होने के बाद आपसी सहमति के आधार पर पत्नी की नसबंदी करा दी गई. लेकिन 6 माह बाद पत्नी की तबियत गड़बड़ होने पर जब अस्पताल में जांच कराई मालुम हुआ कि वह एक बार फिर से गर्भवती है. शारीरिक कमजोरी के चलते गर्भपात भी नहीं कराया जा सका. नतीजतन नसबंदी के बावजूद चौथी संतान के जन्म लेने के बाद अब उसके लालन-पालन को लेकर दंपत्ति चिंतित हो रहे हैं. इसी कड़ी में न्याय और क्षतिपूर्ति की मांग की जा रही है.
शहर के बढ़इया टोला सिद्धार्थ नगर निवासी नंद किशोर बुनकर ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें 7 वर्ष का बेटा, 4 वर्ष की बेटी और 2 वर्ष की बेटी है. तीन संतान होने के बाद पति-पत्नी दोनों से आपसी सहमति से नसबंदी कराने का निर्णय लिया. इसी आधार पर नंद किशोर ने अपनी पत्नी फूलकुमारी कोरी उम्र 29 वर्ष की नसबंदी जिला चिकित्सालय में 23 दिसंबर 2024 को कराई थी.
इतना ही नहीं बल्कि जिला चिकित्सालय द्वारा इस संबंध में प्रमाण पत्र जारी किया गया था. नंद किशोर के अनुसार लगभग 6 महीने पहले उनकी पत्नी की तबियत कुछ बिगडऩे लगी. उल्टियां और चक्कर की समस्या को देखते हुए नंद किशोर ने पत्नी को संजय गांधी मेडिकल कॉलेज रीवा में चिकित्सक को दिखाया. जहां पर हुई जांच में यह चौंकाने वाली जानकारी सामने आई कि उनकी पत्नी फिर से गर्भवती हैं.
लिहाजा वे एक बार फिर अपनी पत्नी को लेकर जिला अस्पताल सतना पहुंचे और नसबंदी के बावजूद पत्नी के गर्भवती होने की जानकारी दी. जिला चिकित्सालय में हुई जांच में भी इस बात की पुष्टि हुई. लिहाजा स्टॉफ द्वारा गर्भपात कराने की सलाह दी गई. लेकिन जांच में शारीरिक कमजोरी सामने आने पर गर्भपात कराने से चिकित्सकों द्वारा मना कर दिया गया. वहीं दो दिन पहले शुरु हुई प्रसव पीड़ा के चलते फूलकुमारी को अस्पताल लाया गया. जहां पर उसने एक और बेटी को जन्म दिया. हलांकि जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ्य बताए गए लेकिन नसबंदी के बावजूद चौथी संतान होने पर उसके लालन-पालन को लेकर दंपत्ति की चिंताएं बढ़ गईं हैं. जिसे देखते हुए उनके द्वारा इस संबंध में न्याय-क्षतिपूर्ति की मांग की जा रही है.
पुष्टि होने पर मिलेगा हर्जाना
इस संबंध में जब सिविल सर्जन एवं अधीक्षक जिला चिकित्सालय डॉ. अमर सिंह से चर्चा की गई तो उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि नसबंदी कराने के बावजूद महिला के मां बनने का प्रकरण उनके संज्ञान में आया है. जिसे देखते हुए नसबंदी से संबंधित सभी दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है. जांच में यदि नसबंदी के फेल होने की पुष्टि होती है तो फिर संबंधित दंपत्ति को नियमानुसार राज्य शासन द्वारा निर्धारित क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाएगी.
