टोक्यो, 26 दिसबंर (वार्ता) जापान के मंत्रिमंडल ने क्षेत्रीय तनाव और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों को देखते हुए शुक्रवार को अब तक के सबसे बड़े रक्षा बजट को अपनी मंजूरी दे दी। आगामी वित्तीय वर्ष के लिए जापान सरकार ने रक्षा क्षेत्र को लगभग 58 अरब डॉलर का आवंटन किया है। जापानी मुद्रा येन में यह राशि नौ हजार अरब येन है।
स्थानीय मीडिया जापान टुडे के मुताबिक इस भारी भरकम बजट का मुख्य उद्देश्य जापान की जवाबी हमले की क्षमता को बढ़ाना और अत्याधुनिक मानवरहित हथियारों, ड्रोनों के जरिए तटीय सुरक्षा को पुख्ता करना है।
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची की सरकार ने यह फैसला चीन की ओर से मिलने वाली चुनौतियों को देखते हुए लिया है। विशेष रूप से ताइवान पर चीन के संभावित हमले को लेकर जापान ने अपनी सुरक्षा नीति में बड़ा बदलाव किया है। प्रधानमंत्री ताकाइची पहले ही संकेत दे चुकी हैं कि ताइवान के मामले में जापानी सेना हस्तक्षेप कर सकती है। जापान अब अपनी रक्षा नीति को आत्मरक्षा तक सीमित रखने के पुराने सिद्धांत से हटकर ‘आक्रामक रक्षा’ की ओर बढ़ रहा है।
बजट का एक बड़ा हिस्सा यानी करीब 970 अरब येन लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास पर खर्च किया जाएगा। इसमें 1,000 किमी रेंज वाली ‘टाइप-12’ मिसाइलें शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, जनसंख्या की कमी और सेना में कम स्टाफ की चुनौती से निपटने के लिए जापान ‘शील्ड’ नामक एक उन्नत प्रणाली विकसित कर रहा है। इसके तहत जल, थल और नभ में संचालित होने वाले बड़े पैमाने पर ड्रोन तैनात किए जाएंगे।
अनुमान है कि जापान का वार्षिक सैन्य खर्च 10 ट्रिलियन येन तक पहुंच जाएगा, जिससे यह अमेरिका और चीन के बाद रक्षा पर खर्च करने वाला दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। जापान ने अपनी जीडीपी का दो प्रतिशत रक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
जापान केवल आयात पर ही नहीं, बल्कि अपने घरेलू रक्षा उद्योग को मजबूत करने पर भी ध्यान दे रहा है। वह ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमान बना रहा है। साथ ही, हाल ही में ऑस्ट्रेलिया द्वारा मित्सुबिशी हैवी इंडस्ट्रीज को अपने जहाजों के अपग्रेडेशन के लिए चुनना जापानी रक्षा उद्योग के लिए एक बड़ी सफलता मानी जा रही है।
इस बजट प्रस्ताव को अब मार्च तक संसद की मंजूरी मिलने की उम्मीद है। सरकार इस खर्च की भरपाई के लिए कॉर्पोरेट और तंबाकू करों में बढ़ोतरी करने की योजना बना रही है।
