नयी दिल्ली, 19 सितंबर (वार्ता) सूक्ष्म लघु एवं मझोले क्षेत्र के उद्यमों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए राजधानी में गुरुवार को आयोजित एक बैठक में उनके लिए कर्ज सुविधाओं को पूरी तरह डिजिटल प्रणाली पर लाने और मजबूत नकदी प्रवाह पर आधारित कर्ज प्रदान करने जैसे विषयों पर चर्चा की गयी।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता में इस बैठक का आयोजन भारतीय बैंक संघ (आईबीए) ने किया था। इसका शीर्षक था- ‘एमएसएमई को सशक्त बनाना: अवसर, चुनौतियां और आगे का रास्ता।’ इसमें सिडबी, सरकारी और निजी बैंकों के वरिष्ठ अधिकारी, आईबीए और एमएसएमई उद्योग संघों के वरिष्ठ प्रतनिधियों ने भाग लिया। वित्त मंत्रालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में कर्जों के लिए आवेदन से लेकर वितरण व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटलीकृत करने , मज़बूत नकदी प्रवाह आधारित अंडरराइटिंग मॉडल, विलंबित भुगतान , एमएसएमई जागरूकता में सुधार, डेटा गुणवत्ता में सुधार, वित्त तक पहुँच में सुधार और अन्य क्षेत्रों में सुझावों पर विचार-विमर्श किया गया।
श्री नागराजू ने एमएसएमई क्षेत्र को अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताया और कहा कि इस क्षेत्र का सकल घरेलू उत्पाद जीडीपी में 30 प्रतिशत और निर्यात में 45 प्रतिशत से अधिक का योगदान है। उन्होंने कहा कि देश और विश्व स्तर पर इस क्षेत्र की इकाइयां उद्यमिता, रोजगार और समावेशी विकास को बढ़ावा देकर जमीनी स्तर पर आर्थिक परिवर्तन ला रही है।
वित्त, प्रौद्योगिकी और बाजारों तक बेहतर पहुंच के साथ उन्हें सशक्त बनाए जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र एक आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के निर्माण की कुंजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उद्योग, सरकार और वित्तीय संस्थान मिल-जुल कर कम कर के एमएसएमई क्षेत्र के लिए नए अवसरों को खोल सकते हैं।
बैठक में इस क्षेत्र के लिए भारत सरकार की पहलों पर एक प्रस्तुति दी गयी। चर्चाओं में इस क्षेत्र के लिए अधिक उत्तरदायी नीतियां और प्रभावशाली समर्थन प्रणालियां बनाने के लिए मध्यम और दीर्घकालिक प्राथमिकताएं निर्धारित की गयी।

