भोपाल: सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों की बढ़ती समस्याओं को लेकर वरिष्ठ कर्मचारी नेताओं ने गंभीर चिंता व्यक्त की। यह विचार गोष्ठी को तुलसीनगर सेकंड स्टॉप स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर में आयोजित की गई, जिसमें राज्य सरकार के विभिन्न विभागों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
बैठक में वक्ताओं ने कहा कि बीते कुछ वर्षों में इन वर्गों के कर्मचारियों की स्थिति लगातार बिगड़ती गई है।
विशेष रूप से पदोन्नति, प्रतिनिधित्व और न्याय तक पहुंच जैसे मुद्दों पर कर्मचारियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिभागियों ने आरोप लगाया कि प्रदेशभर में लगभग 20 दिनों से चल रहे आंदोलनों के बावजूद उनकी मांगों से संबंधित मामलों में एफआईआर तक दर्ज नहीं की जा रही है, जिसे उन्होंने भेदभावपूर्ण रवैया बताया।
मंत्रालय सेवा अधिकारी/कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने अपने संबोधन में वर्ष 2016 से पदोन्नतियों के ठप पड़े होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय के कई फैसलों में स्पष्ट किया जा चुका है कि सामान्य, ओबीसी और अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों की पदोन्नति पर कोई कानूनी रोक नहीं है, इसके बावजूद प्रक्रिया वर्षों से रुकी हुई है। इसके चलते पिछले एक दशक में एक लाख से अधिक कर्मचारी बिना पदोन्नति के ही सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
विस्तृत विचार-विमर्श के बाद बैठक में सनातनी सामान्य ओबीसी अल्पसंख्यक अधिकारी, कर्मचारी एवं पेंशनर्स संघ (सजाक्स) के गठन का निर्णय लिया गया। यह संगठन पदोन्नति, आरक्षण नीति में सुधार, कानूनों के कथित दुरुपयोग, आर्थिक रूप से कमजोर कर्मचारियों के कल्याण और संस्थागत संरक्षण की मांगों को लेकर संघर्ष करेगा।
गोष्ठी में विभिन्न अधिकारी, कर्मचारी और शिक्षक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
