नैनीताल, 11 दिसंबर (वार्ता) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वन विभाग के मुखिया के पद पर रंजन कुमार मिश्रा की नियुक्ति को चुनौती देनी वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता को केंद्रीय न्यायाधिकरण का दरवाजा खटखटाने के निर्देश दिए है।
आरोप है कि प्रदेश सरकार की ओर से वरिष्ठता को धता बता कर विगत 30 नवंबर को रंजन कुमार मिश्रा को वन विभाग के मुखिया (पीसीसीएफ) की जिम्मेदारी दे दी गई थी।
वन सेवा के वरिष्ठतम अधिकारी बीपी गुप्ता ने उनकी नियुक्ति को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति आलोक महरा की खंडपीठ में इस मामले में सुनवाई हुई।
उन्होंने अदालत को बताया कि उनकी वरिष्ठता को नजरंदाज करते हुए राज्य सरकार ने रंजन कुमार मिश्रा को नियुक्ति किया है। रंजन कुमार मिश्रा 1993 बैच के अधिकारी हैं जबकि वह 1992 बैच से संबद्ध हैं।
आगे कहा गया कि उन्होंने सरकार को कई पत्र लिखे लेकिन कोई जवाब नहीं दिया। सरकार का यह कदम केंद्रीय सेवा नियमावली के विरुद्ध है। सरकार के इस कदम से वह हतोत्साहित हैं।
दूसरी ओर सरकार की ओर से कहा गया कि उन्हें विभागीय डीपीसी के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। अंत में अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों और याचिका को खारिज करते हुए उन्हें केन्द्रीय न्यायाधिकरण में अपना पक्ष रखने के निर्देश दे दिए।
प्रदेश में यह पहला मामला है जब राज्य सरकार ने वरिष्ठता को दरकिनार करते हुए प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) की जिम्मेदारी किसी जूनियर अधिकारी को सौंपी है। हालांकि इससे पहले राजीव भरतरी को पीसीसीएफ पद से हटा कर विनोद कुमार को भी यह जिम्मेदारी दी गई थी।
