भोपाल: राजधानी के सबसे बड़े सरकारी हमीदिया अस्पताल परिसर में दो नवजात शिशुओं के अधजले शव मिलने की घटना ने न केवल सनसनी फैलाई बल्कि अस्पताल के अपशिष्ट प्रबंधन की गंभीर खामियों को भी उजागर कर दिया है। जिस पुरानी पानी की टंकी में ये शव मिले, उसे अस्पताल प्रबंधन कथित रूप से कचरा डालने के लिए इस्तेमाल कर रहा था। आग लगने के बाद जब टंकी की सफाई की गई, तब यह भयावह मामला सामने आया।
आग बुझाने पहुंची फायर ब्रिगेड टीम ने जब मलबे की जांच की तो उसमें प्लास्टिक और पन्नी में लिपटे दो नवजातों के अधजले शव मिले। इनमें से एक लगभग 90 फीसदी तक जल चुका था, जबकि दूसरा आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मिला। दोनों शवों को पंचनामा कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है।
घटना ने अस्पताल के जैव चिकित्सा कचरा निपटान सिस्टम, सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस अब अस्पताल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, डीएनए टेस्ट और अन्य फोरेंसिक सबूतों के आधार पर कई एंगल से जांच कर रही है। शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि अस्पताल की व्यवस्था की एक बड़ी चूक का संकेत भी हो सकता है।
