सफाई कर्मियों के नियमितिकरण दावे पर 60 दिनों में लो फैसला

जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट ने सफाई कर्मियों के मामले का पटाक्षेप करते हुए मुख्य नगर पालिका अधिकारी धनपुरी शहडोल को निर्देशित किया है वह आवेदकों के नये अभ्यावेदन पर तर्कसंगत फैसला ले। जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने इसके लिये 60 दिनों की मोहलत दी है। एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि यदि कर्मचारी अपने दावे में वैध पाए जाते हैं और कोई कानूनी रुकावट नहीं है, तो उन्हें अगले 30 दिनों के भीतर लाभ दिया जाना चाहिये।

हाईकोर्ट में यह मामला नगर पालिका धनपुरी में दैनिक वेतन भोगियों के रूप में कार्यरत सफाई कर्मचारियों की ओर से दायसर किया गया था। जिनकी ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, आनंद शुक्ला, विनीत टेहेनगुरिया और शुभम पाटकर ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता कर्मी अनुसूचित जाति के सदस्य हैं, जो कि पिछले कई वर्षों से लगातार सफाई करने का काम करते आ रहे हैं। इतना ही नहीं उनके पास सुरक्षात्मक उपकरणों का भी अभाव है।

आवेदकों का कहना है कि सीएमओं ने बिना लिखित आदेश या सुनवाई के उन्हें अतिरिक्त कर्मचारी घोषित कर साप्ताहिक मस्टर रोल पर ठेकेदार के हवाले कर दिया, जिससे दैनिक वेतन रुक गया है और आर्थिक संकट गहरा गया है । ऐसा केवल इसलिए किया गया कि भविष्य में उनका नियमतिकरण का अधिकार न उत्पन्न हो जाए, जबकि सफाई कार्य नगर पालिका का वैधानिक कर्तव्य है और स्थाई कार्य है।

याचिकाकर्ताओं ने अपने दैनिक मजदूरी के दर्जे को बहाल करने और जग्गो के प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर उनके लम्बे वर्षों की सेवा के आधार पर उनके नियमितिकरण की मांग भी याचिका में की। आवेदकों की ओर से महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 19 सितंबर 2024 के उज्जैन भाषण का भी उल्लेख किया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि सफाई मित्र राष्ट्र निर्माता योद्धा हैं, फिर भी स्थानीय स्तर पर उनका शोषण जारी है। जो किअनुच्छेद 14, 16, 17, 21, 23 का उल्लंघन और 2013 के मैनुअल स्कैवेंजर्स रिहैबिलिटेशन एक्ट की अवहेलना है और सफाई कर्मचारी आयोग अधिनियम की मंशा के भी विपरीत है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने मामले का पटाक्षेप करते हुए उक्त निर्देश दिये।

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Thu Dec 4 , 2025
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