जबलपुर: हाईकोर्ट के जस्टिस एमएस भट्टी की एकलपीठ ने एक सेवानिवृत्त दैनिक वेतन भोगी द्वारा अपनी 27 वर्षों की निष्ठावान सेवा को नियमित करने की गुहार लगाने वाली याचिका में मध्य प्रदेश शासन और नगर पालिका पनागर से जबाव तलब किया है ।दरअसल यह मामला पनागर नगर पालिका परिषद में पंप ऑपरेटर के रूप में 1991 से 2017 तक सेवा देने वाले 70 वर्षीय याचिकाकर्ता रमेश कुमार व्यास की ओर से दायर किया गया है।
जिसमें उनके समान साथी कर्मचारियों की तरह नियमितीकरण, पूर्ण वेतन भत्ते, पेंशन और अन्य लाभों की मांग की गई है या फिर वर्ष 2016 की सरकारी सर्कुलर के तहत स्थायी पद का दर्जा देने का अनुतोष चाहा गया है। याचिका में बताया गया कि याचिकाकर्ता ने 1991 में उम्र सीमा से अधिक आयु होने के बावजूद दैनिक मजदूरी पर नियुक्ति पाई थी, क्योंकि नगर पालिका को जल आपूर्ति जैसी स्थायी आवश्यकता में जरूरत थी।
उन्होंने अन्य साथी कर्मचारियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम किया, जबकि वे सभी नियमित हो गए, लेकिन याचिकाकर्ता की 2017 में 62 वर्ष की आयु का हवाला देकर सेवाएं समाप्त कर दी गईं। केवल 1.68 लाख रुपये के भविष्य निधि भुगतान के अलावा कोई अन्य लाभ या सेवानिवृत्ति प्रमाण-पत्र नहीं दिया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बदतर हो गई। याचिकाकर्ता के अनुसार वर्ष 2011 में परिषद प्रस्ताव के आधार पर सीएमओ ने स्पष्ट रूप से रमेश को चपरासी के रिक्त पद पर नियमित करने योग्य पाया था, जिसमें आयु छूट की सिफारिश की गई।
लेकिन राज्य सरकार ने अनावश्यक अनुमति मांगने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की। याचिका में मध्य प्रदेश नगर निगम कर्मचारी (भर्ती एवं सेवा शर्तें) नियम 1968 का हवाला देते हुए कहा गया कि परिषद अध्यक्ष को बिना राज्य अनुमति के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियमितीकरण का अधिकार है। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने अनावेदकों से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता असीम त्रिवेदी, आशीष शर्मा, आनंद शुक्ला, विनीत टेहेनगुरिया और शुभम पाटकर ने पैरवी की।
