इंदौर: भागीरथपुरा कांड को लेकर आज हाईकोर्ट में जनहित याचिकाओं पर सुनवाई हुई. करीब डेढ़ घंटे चली सुनवाई में सरकार द्वारा कमेटी बनाने, मुआवजा नहीं देने और गैर इरादतन हत्या का प्रकरण दर्ज नहीं होने के तर्क अलग-अलग अधिवक्ताओं ने दिए. उक्त मामले में हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है.आज भागीरथपुरा दूषित पानी को लेकर हाईकोर्ट की डबल बेंच में सुनवाई हुई. जस्टिस अजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की बेंच में सुनवाई के दौरान शासकीय अधिवक्ता ने सरकार द्वारा हाईलेवल कमेटी बनाने की जानकारी दी. इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया ने आपत्ति जताई और कहा कि पहले भी और अभी भी प्रशासनिक अधिकारियों को कमेटी में लिया है. इसका मतलब यह है कि मामले में प्रशासनिक अधिकारियों को बचाया जा सकता है, उनकी जिम्मेदारी तय होने में संदेह है. अधिवक्ता बागड़िया ने कहा कि न्यायिक जांच के लिए न्यायालय के सेवा निवृत्त जज को लेकर कमेटी हो, ज्यादा से ज्यादा कलेक्टर को सदस्य बना लें.
नहीं तो बावड़ी कांड जैसा होगा…
भागीरथपुरा कांड को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता मनीष यादव ने तर्क दिया कि पूर्व में भी बावड़ी कांड में अधिकारी को निलंबित कर बहाल कर दिया गया था. उपहार सिनेमा और दक्षिण में भगदड़ के मामले में गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है. इस मामले में भी जिम्मेदारी तय कर मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए. नहीं तो बावड़ी कांड जैसा हो सब कुछ रफा दफा कर दिया जाएगा.
मौत के आंकड़े ही सही नहीं बताए जा रहे हैं…
सुनवाई के दौरान अधिवक्ता विभोर खंडेलवाल ने पीड़ितों को मुआवजा नहीं देने का मामला उठाते हुए कहा कि मौत के आंकड़े ही सही नहीं बताए जा रहे हैं.
संज्ञान में है…
सभी के तर्क सुनने के बाद हाईकोर्ट के जस्टिस द्वय ने अधिवक्ताओं से कहा कि घटना से जुड़े सभी तर्क और सरकार की कारवाई संज्ञान में है. इसके बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया.
