भोपाल। रक्षा उत्पादन के स्वदेशीकरण को तेज करने के लिए उद्योगों और शिक्षा जगत के बीच साझेदारी को मजबूत बनाने का सशक्त प्रयास किया गया. यह कार्यक्रम राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान भोपाल में आत्मनिर्भर भारत के लिए रक्षा प्रौद्योगिकी में बढ़ावा देने के लिए आयोजित किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड नाशिक के मुख्य कार्यपालक अधिकारी साकेत चतुर्वेदी मौजुद रहे. उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति युवा इंजीनियर, शोध संस्थान और उद्योगों की सहभागिता में है। यदि तकनीक का विकास स्वदेशी स्तर पर संयुक्त प्रयासों से किया जाए तो आने वाले समय में भारत रक्षा और एविएशन सेक्टर में विश्व का नेतृत्व कर सकता है। चतुर्वेदी ने यह भी कहा कि एचएएल आज न सिर्फ लड़ाकू विमान निर्माण में आगे है बल्कि कई महत्वपूर्ण प्रणालियों के पूर्ण स्वदेशीकरण पर केंद्रित है. इस दिशा में एनआईटीटीटीआर जैसे संस्थान अहम भूमिका निभा रहे हैं। निटर भोपाल के निदेशक प्रोफेसर सी सी त्रिपाठी ने बताया कि मध्य प्रदेश रक्षा तकनीक के स्वदेशी विकास में एक मजबूत भूमिका निभाने को तैयार है. निटर ज्ञान सहयोगी संस्थान के रूप में इस दिशा में महत्वपूर्ण काम कर रहा है। वर्तमान में संस्थान प्रदेश के उन तकनीकी संस्थानों की क्षमताओं पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है जो एचएएल की आवश्यकताओं के अनुसार उत्पादन और विकास में योगदान दे सकते हैं। कार्यक्रम में मौजूद आर के भारती ने कहा कि एविएशन और एयरोस्पेस क्षेत्र में एचएएल और निजी उद्योगों के बीच सहयोग आवश्यक है. साथ ही रक्षा क्षेत्र में आवश्यक पुर्जों की उपलब्धता जेट की रफ्तार से होनी चाहिए। रक्षा प्रौद्योगिकी में स्वदेशीकरण पर डॉ अजीत भंडाकर ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम के दौरान अशोक पटेल, सी पी शर्मा, डीन डॉ संजय अग्रवाल, डॉ मनीष भार्गव, डॉ पी के पुरोहित, प्रोफेसर एम ए रिजवी सहित विभिन्न उद्योगों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। संगोष्ठी में उद्योग, तकनीक और शिक्षा जगत के बीच सहयोग की दिशा में कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए और स्वदेशी रक्षा उत्पादन को तेज करने पर व्यापक चर्चा हुई।
