कोलकाता, 24 नवंबर (वार्ता): पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक नया पत्र लिखा , जिसमें उन्होंने बाहरी एजेंसी के माध्यम से ‘डाटा एंट्री ऑपरेटर्स और सॉफ्टवेयर डेवलपर्स’ को नियुक्त करने तथा निजी आवासीय परिसरों के अंदर मतदान केंद्र बनाने पर विचार करने के संबंध में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) द्वारा रखे गए दो प्रस्तावों का विरोध किया है।
सुश्री बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में कहा, “मुझे आपको दो परेशान करने वाले लेकिन जरूरी घटनाक्रमों के बारे में लिखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है, जो मेरे संज्ञान में लाए गए हैं और मेरे विचार से, इन पर आपके तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है।”
मुख्यमंत्री ने पत्र में ‘डाटा एंट्री कर्मियों को आउटसोर्स करने’ के लिए राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा जारी प्रस्ताव और राज्य में 2026 के विधानसभा चुनावों के दौरान निजी आवासीय परिसरों के अंदर मतदान केंद्र स्थापित करने के प्रस्ताव पर सवाल उठाए हैं।
सुश्री बनर्जी ने कहा, “हाल ही में यह सामने आया है किव पश्चिम बंगाल मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) संबंधी या अन्य चुनाव-संबंधी ‘डेटा कार्य’ के लिए संविदात्मक ‘डाटा एंट्री ऑपरेटर्स’ और बांग्ला सहायता केंद्र (बीएसके) के कर्मचारियों को नियुक्त नहीं करने का निर्देश दिया है। साथ ही, अधिकारी के कार्यालय ने एक साल की अवधि के लिए 1,000 ‘डाटा एंट्री ऑपरेटर्स’ और 50 ‘सॉफ्टवेयर डेवलपर्स’ को नियुक्त करने के लिए एक ‘रिक्वेस्ट फ़ॉर प्रपोज़ल’ (आरएफपी) जारी किया है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला कार्यालयों के पास पहले से ही पर्याप्त योग्य कर्मचारी हैं और वे अपनी व्यवस्था करने के लिए सशक्त हैं।उन्होंने सवाल किया, “जब जिला कार्यालयों के पास पहले से ही ऐसे कार्य करने वाले पर्याप्त संख्या में सक्षम पेशेवर हैं, तो एक बाहरी एजेंसी के माध्यम से पूरे एक साल के लिए उसी काम को ‘आउटसोर्स’ करने की क्या आवश्यकता है?”
सुश्री बनर्जी ने सवाल, “परंपरागत रूप से, फील्ड कार्यालयों ने हमेशा आवश्यकतानुसार अपने स्वयं के संविदात्मक डाटा एंट्री कर्मियों को नियुक्त किया है। यदि कोई तत्काल आवश्यकता है, तो डीईओ स्वयं ऐसी नियुक्ति करने के लिए पूरी तरह से सशक्त हैं। फिर, सीईओ का कार्यालय फील्ड कार्यालयों की ओर से यह भूमिका क्यों निभा रहा है?”
मुख्यमंत्री ने कहा, “पहले से लगे हुए और प्रस्तावित एजेंसी के माध्यम से नियुक्त किए जाने वालों के बीच सेवा शर्तों या संविदात्मक दायित्वों में क्या वास्तविक अंतर अपेक्षित है? क्या यह कवायद निहित स्वार्थों की पूर्ति के लिए किसी राजनीतिक दल के इशारे पर की जा रही है? इस आरएफपी का समय और तरीका निश्चित रूप से वैध संदेह पैदा करता है।”
सुश्री बनर्जी ने निजी आवासीय परिसरों के अंदर मतदान केंद्र स्थापित करने के सीईओ के विचार का भी विरोध किया। उन्होंने कहा, “मुझे आगे यह जानकारी दी गई है कि चुनाव आयोग निजी आवासीय परिसरों के भीतर मतदान केंद्र स्थापित करने पर विचार कर रहा है और डीईओ से सिफारिशें प्रदान करने के लिए कहा गया है। यह प्रस्ताव समस्याग्रस्त है। मतदान केंद्र हमेशा सरकारी या अर्ध-सरकारी संस्थानों में स्थित रहे हैं और बने रहने चाहिए। निजी इमारतों से स्पष्ट कारणों से बचा जाता है, वे निष्पक्षता से समझौता करते हैं, स्थापित मानदंडों का उल्लंघन करते हैं और विशेषाधिकार प्राप्त निवासियों तथा आम जनता और संपन्न लोगों के बीच भेदभावपूर्ण अंतर पैदा करते हैं। इस तरह के कदम पर विचार क्यों किया जा रहा है?”
मुख्यमंत्री ने तीखा सवाल करते हुए पूछा, “एक बार फिर, क्या यह किसी राजनीतिक दल के पक्षपातपूर्ण एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए दबाव में किया जा रहा है? क्यों? क्यों? क्यों?”
