बाल विज्ञान प्रदर्शनी में उभरी नई प्रतिभायें, एमपी को विज्ञान हब बनाने की तैयारी

भोपाल। मध्यप्रदेश देश के केंद्र में होने के साथ ही विज्ञान अनुसंधान के लिए अनुकूल वातावरण रखता है। राष्ट्रीय बाल वैज्ञानिक प्रदर्शनी के समापन समारोह में खेल युवा कल्याण और सहकारिता मंत्री विश्वास सारंग ने यह कहते हुए भरोसा जताया कि प्रदेश को वैज्ञानिक अनुसंधान का प्रमुख केंद्र बनाया जा सकता है। जिससे यहां होने वाले समन्वित प्रयास देश के अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होंगे। शनिवार को विज्ञान प्रदर्शनी समापन के अवसर पर तेईस राज्यों और सात केंद्र शासित प्रदेशों सहित अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के आठ सौ से अधिक बाल वैज्ञानिकों ने अपने दो सौ चालीस मॉडल प्रदर्शित किए। जिसको देखने शहर भर के कई राष्ट्रीय विशेषज्ञों और शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। समारोह में मंत्री सारंग ने प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए जय जवान जय किसान जय विज्ञान और जय अनुसंधान के संदेश को दोहराते हुए अनुसंधान की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नई पहल करते हुए मेडिकल शिक्षा को हिंदी माध्यम में उपलब्ध कराने के लिए पाठ्य सामग्री तैयार कराई है।

कार्यक्रम में केंद्रीय स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग के सचिव संजय कुमार ने नई शिक्षा नीति में मातृ भाषा आधारित प्रारंभिक शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों का बौद्धिक विकास मातृ भाषा में अधिक प्रभावी होता है इसलिए प्रारंभिक कक्षाओं में शिक्षण इसी माध्यम में होना चाहिए। उन्होंने बच्चों को आनंदमय वातावरण में पढ़ाने और शिक्षा की सतत उपलब्धता सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

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