केरला महोत्सव: लोकनृत्य और पारंपरिक व्यंजनों के मेल से रूबरू हुए भोपालवासी

भोपाल: चार दिवसीय सांस्कृतिक समृद्धि के शानदान प्रदर्शन के साथ केरला महोत्सव का समापन रविवार शाम हुआ। महोत्सव के अंतिम दिन दर्शकों की भीड़ व्यंजनों की दुकानों सहित केरला के मसालों और सुपर मार्केट में दिखी। बड़ी संख्या में लोग केरल के मसालों और रेडी टू ईट वस्तुओं को खरीदते हुए नजर आए। उत्सव के आखिरी दिन कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, मलयालम फिल्म निर्देशक वरुण बीच की शोभा बढ़ाई।

दिग्विजय सिंह ने यूनाइटेड मलयाली एसोसिएशन को केरल की कलात्मक विरासत को भोपाल तक लाने के लिए बधाई दी। साथ ही सभी कलाकारों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सराहना भी की। उत्सव की सफलता पर यूएम के अध्यक्ष ओ.डी. जोसेफ ने भोपालवासियों द्वारा केरल फेस्ट को मिले उत्साह को प्रेरणादायी बताया।
लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने उत्सव में डाली जान
रविवार समापन के अवसर पर शास्त्रीय और लोकनृत्य प्रस्तुतियों की श्रृंखला ने भारत की विविध कलात्मक परंपराओं का सजीव प्रदर्शन किया। जिसके बाद कथकली की मोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को केरल की शास्त्रीय नृत्य-नाट्य परंपरा के सौंदर्य से रूबरू कराया। कलाकारों के रंग-बिरंगे परिधानों, विशिष्ट श्रृंगार और रामायण व महाभारत जैसे महाकाव्यों पर आधारित भावपूर्ण अभिनय ने दर्शकों को आध्यात्मिकता से जोड़ दिया।
भोपालवासियों ने केरला व्यंजनों का भरपूर लिया जायका
केरल के स्वादिष्ट व्यंजनों की खुशबू आखिरी दिन यूं फैली कि आने वाला हर व्यक्ति फूड स्टॉल पर व्यंजनों का स्वाद लेते दिखा। इन व्यंजनों ने शहरवासियों को केरल के कई पाक-स्वादों का परिचय करवाया। जिसमें पलाप्पम, इडियप्पम और कडाला करी, केला फ्राई, कुम्बलप्पम, कप्पा चटनी, परिप्पु वड़ा, इडली-सांबर, वड़ा, मसाला डोसा जैसे व्यंजन का लोगों ए खूब लुफ्त उठाया।

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