जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट में करीब चार लाख 80 हजार लंबित मामलों का बोझ है। इसी को गंभीरता से लेकर क्रिमनल केस निराकृत करने युद्ध स्तर पर प्रयास को गति दी गई है। इसके अंतर्गत 10 विशेष बेंच गठित कर दी गई हैं। इनके जरिए क्रिमनल केस सुने जाएंगे। आज शनिवार 20 सितंबर से इस अभियान को गति दी जाएगी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन जबलपुर के अध्यक्ष धन्य कुमार जैन व सचिव परितोष त्रिवेदी ने जानकारी देते हुए बताया कि मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा को पत्र लिखकर मांग की गई थी।
जिसे गंभीरता से लेकर उक्त कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में हाईकोर्ट की मुख्यपीठ जबलपुर में तीन हजार के लगभग जमानत अर्जियां लंबित हैं। जजों के कुल स्वीकृत पद 53 के मुकाबले महज 41 जज पदस्थ हैं। इस वजह से लंबित प्रकरणों के निराकरण में गति परिलक्षित नहीं हो पा रही है। आलम यह है कि जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों की जमानत अर्जियों पर लंबे समय तक सुनवाई नहीं हो पाती। स्पेशल बेंचों के गठन से इन मामलों के त्वरित निपटारे की उम्मीद है, जिससे न्याय मिलने में देरी नहीं होगी।
ये जज करेंगे मामलों की सुनवाई
सीजे संजीव सचदेवा की गठित स्पेशल बेंच में शामिल जजों में जस्टिस अचल कुमार पालीवाल, जस्टिस प्रमोद कुमार अग्रवाल, जस्टिस देवनारायण मिश्रा, जस्टिस दीपक खोत, जस्टिस अजय कुमार निरंकारी, जस्टिस हिमांशु जोशी, जस्टिस रामकुमार चौबे, जस्टिस रत्नेशचंद्र सिंह बिसेन, जस्टिस बीपी शर्मा और जस्टिस प्रदीप मित्तल के नाम शामिल हैं।
