हरिद्वार, 15 नवम्बर (वार्ता) उत्तराखंड में रुड़की शहर शनिवार को भूकंप मॉक ड्रिल से थर्रा उठा। आपदा प्रबंधन, प्रशासन, पुलिस और फायर ब्रिगेड की संयुक्त टीमों ने सुबह विभिन्न स्थानों पर सायरन बजाकर भूकंप बचाव का बड़ा ऑपरेशन चलाया। इस दौरान टीमों ने पहली बार डिजिटल ट्विन तकनीक का उपयोग करते हुए पूरे अभ्यास को हाई-टेक तरीके से अंजाम दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सायरन बजते ही शहर के इलाकों में अफरा-तफरी जैसा माहौल बन गया और राहत दल तेजी से बताए गए स्थानों पर पहुंचे। टीमों की प्रतिक्रिया समय, पहुँच, समन्वय और बचाव कार्य की गति को बारीकी से जांच किया गया।
मॉक ड्रिल के लिए बीएसएम इंटर कॉलेज को मुख्य कमांड सेंटर बनाया गया, जबकि हरिद्वार–रुड़की विकास प्राधिकरण कार्यालय को राहत केन्द्र घोषित किये गये। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और एम्बुलेंस की गाड़ियाँ सायरन बजाती हुई मौके पर पहुंचीं। कई घायलों को दर्शाया गया, जिन्हें एम्बुलेंस से तेजी से सिविल अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर पहले से ही अलर्ट मोड पर मौजूद थे।
पूरा शहर एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और पुलिस के सायरन से गूंजता रहा, जिससे वास्तविक आपदा जैसा माहौल तैयार हुआ।
संयुक्त मजिस्ट्रेट दीपक रामचंद्र शेट ने कहा कि यह मॉक ड्रिल आपदा से निपटने की क्षमताओं, संसाधनों और समन्वय की कार्यकुशलता परखने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील है, ऐसे में समुदायों की तैयारी, प्रशिक्षण और तकनीक का उपयोग जीवनरक्षक साबित हो सकता है।
उन्होंने बताया कि डिजिटल ट्विन तकनीक के उपयोग से यह समझने में मदद मिली कि भूकंप, बाढ़ या आग जैसी आपदा के समय किस प्रकार प्रतिक्रिया की जा सकती है और किस स्थान पर सुधार की आवश्यकता है।
